कोलकाता, 04 मई।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों के दिन सोमवार को ‘झालमुरी’ एक बार फिर राजनीतिक चर्चा और जश्न का केंद्र बन गया, जिसे भाजपा और एनडीए नेताओं ने अपनी बढ़त के उत्सव के प्रतीक के रूप में अपनाया।
चुनावी प्रचार के दौरान चर्चित हुआ यह मसालेदार स्नैक उस समय सुर्खियों में आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झाड़ग्राम में सड़क किनारे रुककर इसका स्वाद लिया था। इसके बाद यह दृश्य व्यापक रूप से साझा हुआ और चुनावी माहौल में खास पहचान बना गया।
इसके बाद प्रचार के अंतिम चरण में ‘झालमुरी’ अचानक राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया और विभिन्न प्रतिक्रियाओं के साथ चर्चा में आ गया, जिसमें राज्य नेतृत्व पर टिप्पणियां भी शामिल रहीं।
‘झाल’ शब्द से जुड़े इस लोकप्रिय स्नैक का अर्थ तीखे स्वाद से होता है, जिसने चुनावी वातावरण में एक प्रतीकात्मक रूप ले लिया और प्रचार में इसका विशेष उल्लेख होने लगा।
चुनावी रैली के दौरान प्रधानमंत्री ने इस पर टिप्पणी करते हुए इसे राजनीतिक संदर्भ से जोड़ दिया, जिससे यह और अधिक चर्चा में आ गया और चुनावी विमर्श का हिस्सा बन गया।
मतगणना के दौरान भाजपा की बढ़त मजबूत बनी रही और पार्टी बहुमत के आंकड़े से काफी आगे चलती नजर आई, जिसके बाद कार्यकर्ताओं और नेताओं ने इस प्रतीक को जश्न के रूप में अपनाया।
केंद्रीय मंत्री ने झालमुरी खाते हुए कहा कि यह जीत का स्वाद दर्शाने वाला प्रतीक बन गया है और उन्होंने प्रधानमंत्री नेतृत्व तथा संगठनात्मक प्रयासों के लिए बधाई भी दी।
अन्य केंद्रीय मंत्री ने जनादेश को जनता की निर्णायक इच्छा बताते हुए कहा कि लोगों ने विकास और भविष्य के लिए मतदान किया है तथा पार्टी पर भरोसा जताया है।
एक अन्य राजनीतिक नेता ने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा और इसे लोकतंत्र की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने संगठनात्मक नेतृत्व और रणनीतिक भूमिका की सराहना करते हुए इसे राजनीतिक सफलता का महत्वपूर्ण चरण बताया।
इसी बीच विभिन्न राज्यों में पार्टी की सफलता का जश्न मनाते हुए नेताओं ने अलग-अलग स्थानों पर ‘झालमुरी’ के साथ उत्सव मनाया और इसे प्रतीकात्मक रूप से अपनाया।






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