हरिद्वार, 26 मई।
जिले के वन प्रभाग में दो बाघों के अवैध शिकार की सनसनीखेज घटना के बाद वन विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए संबंधित वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वन्यजीवों की सुरक्षा में लापरवाही बरतने के आरोप में यह कार्रवाई विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्यामपुर रेंज के अंतर्गत दो बाघों के शव बरामद हुए थे। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बाघों की मृत्यु प्राकृतिक नहीं थी, बल्कि उन्हें जहर देकर मारा गया था। इतना ही नहीं, शिकारियों द्वारा बाघों के पंजे भी काट लिए गए थे, जिससे एक संगठित वन्यजीव तस्करी गिरोह की संलिप्तता की आशंका बलवती हो गई है।
प्रमुख बिंदु:
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निलंबन: मामले में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर संबंधित वन क्षेत्राधिकारी को निलंबित कर विभागीय जांच के दायरे में रखा गया है।
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गिरफ्तारियां: पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की धरपकड़ के लिए दबिश जारी है।
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गंभीर चूक: जांच में क्षेत्रीय गश्त प्रणाली और खुफिया तंत्र की विफलता के गंभीर संकेत मिले हैं।
यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। वन्यजीव संरक्षण के लिए कार्यरत शीर्ष संस्थानों ने इस घटना का संज्ञान लिया है और जांच के लिए एक टीम के शीघ्र उत्तराखंड पहुंचने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना बाघ संरक्षण की वर्तमान व्यवस्थाओं में बड़ी खामियों को दर्शाती है। विभाग के अनुसार, उच्चस्तरीय जांच के बाद अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।














