उत्तराखंड
25 May, 2026

वनाग्नि की चुनौती से निपटने के लिए उत्तराखंड सरकार सक्रिय, वन मंत्री ने साझा की कार्ययोजना

उत्तराखंड में वन मंत्री ने जलवायु परिवर्तन को वनाग्नि का मुख्य कारण बताया है। सरकार संवेदनशील क्षेत्रों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, कर्मियों का बीमा और जनसहयोग के माध्यम से स्थिति को नियंत्रित कर रही है।

देहरादून, 25 मई।

उत्तराखंड के वनों में बढ़ती अग्नि की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताते हुए वन मंत्री सुबोध उनियाल ने जलवायु परिवर्तन को इसके लिए एक प्रमुख वैश्विक कारक माना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निरंतर बढ़ता तापमान, गिरता भूजल स्तर और मिट्टी की नमी में आई कमी जैसे पर्यावरणीय असंतुलन जंगलों में आग लगने की घटनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि वनाग्नि पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से राज्य प्रशासन ने सभी जिलों में अनुभवी नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है ताकि उनकी विशेषज्ञता का लाभ उठाया जा सके। वन रक्षकों के सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए उन्हें 10 लाख रुपये तक की बीमा सुरक्षा प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों को आधुनिक और उन्नत संसाधन उपलब्ध कराकर उनके उत्साहवर्धन का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।

राज्य भर में कुल 622 अति-संवेदनशील स्थलों की पहचान की गई है, जहाँ आग लगने का जोखिम सर्वाधिक बना रहता है। इन क्षेत्रों में प्रभावी सुरक्षा घेरा तैयार करने के लिए ग्राम प्रधानों और स्थानीय निवासियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

सुबोध उनियाल का मानना है कि राज्य के सभी 13 जनपदों में प्रशासन, वन महकमे और जनसमुदाय के आपसी समन्वय से वनाग्नि पर पूरी तरह नियंत्रण पाना संभव है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले वन कर्मियों को पुरस्कृत करने की नीति भी क्रियान्वित की गई है, ताकि कार्यबल का मनोबल ऊंचा रहे। अंत में, उन्होंने नागरिकों से वनाग्नि को रोकने की दिशा में शासन और प्रशासन को पूर्ण सहयोग देने का आह्वान किया है।

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