भोपाल, 26 मई।
सोशल मीडिया पर अब सिर्फ भड़काऊ पोस्ट डालना ही नहीं, बल्कि उसे लाइक, शेयर या फॉरवर्ड करना भी अपराध माना जाएगा। भोपाल में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा-163 के तहत पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। उद्देश्य है आगामी त्योहारों से पहले सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना और प्रदेश की गंगा-जमुनी तहजीब को सुरक्षित रखना।
पुलिस के अनुसार फेसबुक, वॉट्सऐप, एक्स, इंस्टाग्राम जैसे मंचों पर कुछ असामाजिक तत्व धार्मिक और जातिगत भावनाएं भड़काने वाले संदेश, फोटो और वीडियो प्रसारित कर रहे हैं। कई बार मूल पोस्ट से अधिक उसके कमेंट और क्रॉस-कमेंट माहौल बिगाड़ते हैं। द्वेषपूर्ण और अश्लील टिप्पणियां समाज में तनाव पैदा कर रही हैं, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
धारा-163 को पुराने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-144 जैसा माना जा रहा है, लेकिन अब इसका दायरा डिजिटल दुनिया तक बढ़ा दिया गया है। तर्क स्पष्ट है कि आज एक शेयर हजारों लोगों तक नफरत पहुंचा सकता है। इसलिए सरकार इसे केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि प्रसार का माध्यम मान रही है। यह डॉ. मोहन यादव सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति का हिस्सा है, जिसका मकसद मध्यप्रदेश को सांप्रदायिक तनाव से बचाना है।
हालांकि, इस आदेश के क्रियान्वयन में संतुलन भी जरूरी होगा। “भड़काऊ” सामग्री की परिभाषा स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि व्यंग्य, बहस और नफरत के बीच अंतर बना रहे। कार्रवाई केवल उन लोगों पर हो, जो जानबूझकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास करते हैं।
साथ ही डिजिटल साक्षरता अभियान चलाना भी समय की मांग है। स्कूलों, कॉलेजों और मोहल्ला समितियों में यह समझाना होगा कि “फॉरवर्ड करने से पहले तथ्य जांच जरूरी है।” कानून का डर हो, लेकिन दहशत नहीं। भोपाल का यह कदम समय की जरूरत है। असली सफलता तब होगी, जब समाज खुद जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाएगा।














