नई दिल्ली, 26 मई ।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े जारी करते हुए बताया है कि खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1,87,105 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है।
आयोग के अनुसार पिछले वर्षों में इस क्षेत्र ने रोजगार सृजन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है और वर्तमान में 2.04 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिली है।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के माध्यम से लाखों लोगों को स्वरोजगार के अवसर मिले हैं, जबकि ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत बड़ी संख्या में कारीगरों को आधुनिक मशीनें और टूल-किट उपलब्ध कराए गए हैं।
आयोग ने बताया कि इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमशीलता को बढ़ावा मिला है और महिलाओं की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है, जिससे यह क्षेत्र महिला सशक्तीकरण का मजबूत आधार बन गया है।
वर्ष 2025-26 में हजारों लोगों को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं, वहीं विभिन्न योजनाओं के तहत लाखों महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए।
खादी क्षेत्र में कार्यरत कारीगरों में अधिकांश महिलाएं शामिल हैं, जिससे यह क्षेत्र महिला नेतृत्व वाले आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।
कारीगरों के पारिश्रमिक में भी पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे उनकी आय में सुधार हुआ है।
इसके अलावा खादी उत्पादों की सरकारी खरीद और विपणन गतिविधियों में भी वृद्धि देखी गई है, जबकि राष्ट्रीय ध्वजों की बिक्री में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के बाद तेजी आई है।
आयोग ने कहा कि खादी अब केवल एक पारंपरिक उत्पाद नहीं रह गई है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत और ग्रामीण समृद्धि का प्रतीक बन चुकी है।















