भोपाल, 26 मई ।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए महिला वित्त एवं विकास निगम को नई कार्य संस्कृति और परिणामोन्मुखी भूमिका में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
मंत्रालय में आयोजित निगम की 80वीं संचालक मंडल बैठक की अध्यक्षता महिला-बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने की, जिसमें महिला रोजगार, कौशल विकास और संस्थागत सुधारों पर कई अहम निर्णय लिए गए।
बैठक में मंत्री भूरिया ने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन नहीं, बल्कि महिलाओं का वास्तविक आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण होना चाहिए।
उन्होंने निर्देश दिए कि निगम को प्रदेश की महिला वर्क-फोर्स तैयार करने वाली प्रमुख संस्था के रूप में विकसित किया जाए और इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया जाए, जिसमें महिलाओं की कौशल दक्षता का परीक्षण कर उन्हें विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सके।
अकुशल और अर्द्ध-कुशल महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें उद्योगों और विभागों की जरूरत के अनुसार रोजगार से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
मंत्री ने कहा कि महिला श्रमिकों और कारीगरों का “रिसोर्स पूल” तैयार किया जाएगा, जिससे जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित महिला वर्क-फोर्स उपलब्ध कराई जा सके।
बैठक में यह भी तय हुआ कि निगम केवल वित्तीय कार्यों तक सीमित न रहकर कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाएगा।
“शी-मार्ट” प्रस्ताव पर देरी को लेकर नाराजगी व्यक्त की गई और कहा गया कि समय पर कार्रवाई होती तो प्रदेश अग्रणी बन सकता था।
साथ ही IPE Global Limited के साथ हुए एमओयू की समीक्षा की गई, जिसके तहत 2030 तक 1.6 लाख महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और हजारों महिलाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।
बैठक में प्रशासनिक अनुशासन को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए और अन्यत्र अटैच कर्मचारियों को मूल पदस्थापना पर लौटने के आदेश दिए गए।














