नई दिल्ली, 29 मई।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार को 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर अपने दूसरे चरण के दीर्घकालिक पूर्वानुमान में इस वर्ष मानसून के सामान्य से कमजोर रहने की चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही जून माह में भीषण गर्मी और लू चलने की संभावना जताई गई है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन और मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने यहां आयोजित प्रेस वार्ता में आगामी मौसम संबंधी अनुमान साझा किए।
उन्होंने बताया कि जून से सितंबर 2026 के बीच देश में कुल मानसूनी वर्षा दीर्घकालिक औसत का लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस वर्ष मानसून कमजोर रहने की आशंका अधिक है, जिसमें सामान्य से कम बारिश की संभावना लगभग 84 प्रतिशत तक आंकी गई है। 1971 से 2020 के आंकड़ों के अनुसार देश में मानसून के दौरान औसत वर्षा लगभग 87 सेंटीमीटर रहती है। कम वर्षा से कृषि, जल संकट और गर्मी की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
रविचंद्रन के अनुसार देश के अधिकतर हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा की संभावना है, हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-पूर्व भारत, पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र और पूर्वी-मध्य भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या उससे अधिक बारिश के संकेत मिल सकते हैं।
उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से कम वर्षा की संभावना 46 प्रतिशत, मध्य भारत में 43 प्रतिशत, दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 45 प्रतिशत तथा मानसून कोर जोन में भी कम बारिश की आशंका अधिक बनी हुई है। जून 2026 में भी देशभर में औसत वर्षा सामान्य से कम रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि कम बारिश का प्रभाव कृषि उत्पादन, जलाशयों, बिजली आपूर्ति और पेयजल व्यवस्था पर पड़ सकता है, जिससे सूखे और गर्मी की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार जून 2026 में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है और कई राज्यों में लू के दिनों की संख्या बढ़ सकती है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु में लू का खतरा अधिक रहेगा, जबकि राजस्थान और झारखंड में अपेक्षाकृत कम लू पड़ने की संभावना है।
विशेषज्ञों ने बताया कि प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना है, जो सामान्यतः भारत में मानसून को कमजोर करती है। वहीं हिंद महासागर द्विध्रुव फिलहाल तटस्थ स्थिति में बना हुआ है।
अधिकारियों ने राज्य सरकारों और जिला प्रशासन को गर्मी तथा जल संकट से निपटने के लिए पहले से तैयारी करने की सलाह दी है। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि तेज धूप से बचें, पर्याप्त पानी पिएं और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।







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