देहरादून, 29 मई ।
दून विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ब्रिक्स अकादमिक मिड-टर्म सम्मेलन का शुक्रवार को समापन हुआ। सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र और इथियोपिया सहित 11 देशों के प्रतिनिधियों ने वैश्विक चुनौतियों और उनके समाधान को लेकर व्यापक चर्चा की।
सम्मेलन का उद्घाटन उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के उपाध्यक्ष प्रो. हर्ष वी. पंत और विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव एवं ब्रिक्स उप-शेरपा शंभू एल. हक्की ने किया। इस दौरान रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज़ के महानिदेशक प्रो. सचिन कुमार शर्मा भी मौजूद रहे।
“बिल्डिंग फॉर रिज़िलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” विषय पर आधारित सम्मेलन में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 की प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। हिमालयी क्षेत्र उत्तराखंड में आयोजित इस कार्यक्रम में सतत विकास, लचीलेपन और पर्यावरणीय चुनौतियों पर विशेष जोर दिया गया।
सम्मेलन के दौरान हरित औद्योगिक परिवर्तन, स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के जरिए जैव विविधता संरक्षण और न्यायसंगत हरित बदलाव के लिए जलवायु वित्त जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। विभिन्न देशों से पहुंचे प्रतिनिधियों ने वैश्विक सहयोग बढ़ाने और साझा रणनीति विकसित करने पर बल दिया।
दक्षिण अफ्रीका, रूस, चीन, ब्राजील, मिस्र और ईरान सहित कई देशों के विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने सम्मेलन में भाग लेते हुए पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और जलवायु से जुड़े मुद्दों पर अनुभव साझा किए। उत्तराखंड के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने भी सत्रों में सक्रिय सहभागिता की।
सम्मेलन में हुए विचार-विमर्श को भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया। विशेषज्ञों ने हरित विकास, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु वित्त के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।











