मुंबई, 04 जून।
निर्देशक निखिल आडवाणी ने अपनी चर्चित फिल्म 'कल हो ना हो' को लेकर हाल ही में खुलकर अपनी राय व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि 2003 में रिलीज हुई यह फिल्म आज भी दर्शकों के दिलों के बेहद करीब है, लेकिन बदलती सामाजिक और सांस्कृतिक संवेदनाओं के मद्देनजर इसके कुछ हिस्सों को नए दौर के अनुसार ढालने की आवश्यकता है।
निखिल के अनुसार, फिल्म में कुछ हास्य दृश्य, खासकर कांताबेन से जुड़े मजाक, आज के दर्शकों के नजरिए से प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। उन्होंने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि यदि 'कल हो ना हो' का रीमेक बनाया जाए तो कहानी को नए अंदाज में पेश किया जा सकता है और इसमें अमन और रोहित के रिश्ते को रोमांटिक एंगल के साथ दिखाने पर भी विचार किया जा सकता है।
निर्देशक ने फिल्म की असली ताकत अमन और रोहित के रिश्ते में देखी। उनका कहना है कि फिल्म का भावनात्मक असर तब पूर्ण होता है जब दोनों एक-दूसरे से वादा करते हैं। निखिल ने बताया कि आज के दर्शक फिल्म को नए नजरिए से देखते हैं और अक्सर सवाल करते हैं कि कहानी के महत्वपूर्ण संवादों में नैना की उपस्थिति क्यों नहीं थी।
निखिल आडवाणी की यह टिप्पणी दर्शकों और फिल्म समीक्षकों के बीच क्लासिक फिल्मों को नए संदर्भ में देखने और समझने की बहस को फिर से जीवित कर रही है। उन्होंने साफ किया कि बदलती सोच और नए सवाल समय-समय पर फिल्मों को पुनः प्रस्तुत करने की आवश्यकता की ओर इशारा करते हैं।






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