नई दिल्ली, 21 अप्रैल
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। दोनों देशों ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही, खुले, समावेशी और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए साझा दृष्टिकोण को भी पुनः पुष्ट किया गया है।
संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया है कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक और ऊर्जा सहयोग उनकी रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव है। यह सहयोग पारदर्शिता, खुले बाजार और नियम आधारित व्यापार व्यवस्था पर आधारित है, जिसे दोनों देशों की आर्थिक स्थिरता और विकास के लिए आवश्यक बताया गया है। वैश्विक परिस्थितियों के उद्योगों और बाजारों पर प्रभाव को ध्यान में रखते हुए समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के अंतर्गत सहयोग को और आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। इसके माध्यम से ऊर्जा व्यापार और निवेश को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। वर्तमान में भारत दक्षिण कोरिया को नैफ्था और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करता है, जबकि दक्षिण कोरिया भारत को पेट्रोलियम उत्पाद और लुब्रिकेंट बेस ऑयल उपलब्ध कराता है।
बयान में ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने, ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया को तेज करने और ऊर्जा संसाधनों में खुले व्यापार को समर्थन देने की बात कही गई है। एलएनजी उपभोक्ता देशों के रूप में बाजार की स्थिरता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आपसी सहयोग के अवसरों पर भी चर्चा हुई।
दोनों देशों ने यह भी माना कि समुद्री ढांचा और जहाज निर्माण क्षेत्र ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी दिशा में जहाज निर्माण सहयोग को बढ़ाने पर सहमति बनी है, जिसमें भारत में शिपयार्ड की स्थापना, मौजूदा शिपयार्ड का आधुनिकीकरण, तकनीकी सहयोग और मानव संसाधन विकास शामिल हैं।
संयुक्त बयान में दोनों देशों ने ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने का संकल्प दोहराया है। साथ ही क्षेत्रीय साझेदार देशों से अपील की गई है कि वे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर और खुला बनाए रखने में सहयोग करें, ताकि सभी देशों की सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित हो सके।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्यूंग के बीच हुई वार्ता में आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने पर जोर दिया गया। इस दौरान व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने की संभावनाओं को महत्वपूर्ण बताया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक नेताओं का संवाद आर्थिक साझेदारी की व्यापक संभावनाओं को सामने लाता है। उन्होंने यह भी बताया कि समुद्री परंपराओं से जुड़े दोनों देशों के बीच सहयोग प्राकृतिक रूप से मजबूत है और इसमें बड़े अवसर मौजूद हैं।
समुद्री क्षेत्र को भारत की सुरक्षा और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए ‘समुद्री अमृत काल 2047 विजन’ के तहत नए सहयोग अवसरों को रेखांकित किया गया। जहाज निर्माण, बंदरगाह विकास और समुद्री लॉजिस्टिक्स में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
भारत ने कोरिया की बड़ी शिपबिल्डिंग कंपनियों को भारत में प्रस्तावित परियोजनाओं में तकनीकी और रणनीतिक साझेदार बनने का आमंत्रण दिया है, ताकि डिजाइन, उत्पादन, आधुनिक निर्माण और गुणवत्ता जैसे क्षेत्रों में उनके अनुभव का लाभ लिया जा सके।
कोरियाई पक्ष ने भी इस सहयोग को आगे बढ़ाने में निजी क्षेत्र की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए सकारात्मक उम्मीद जताई है।









