21 मार्च।
भारत की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री लगातार विस्तार की ओर बढ़ रही है और 2030 तक घरेलू फार्मा मार्केट की वैल्यू $130 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है।
सरकारी तथ्यपत्र के अनुसार, देश की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री अब ग्लोबली इंटीग्रेटेड और पॉलिसी-सपोर्टेड सेक्टर बन चुकी है, जो वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया में तीसरे और वैल्यू के हिसाब से 11वें स्थान पर है। इसमें 3,000 से अधिक कंपनियां और 10,500 से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट संचालित हैं, जो इसके विस्तार और उत्पादन क्षमता को दर्शाती हैं।
इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में कहा गया है कि FY25 में इंडस्ट्री का सालाना टर्नओवर ₹4.72 लाख करोड़ रहा। पिछले एक दशक में, FY15 से FY25 तक फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट 7 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट से बढ़ी है।
भारत जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा वैश्विक सप्लायर है, जो विश्वभर की सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत प्रदान करता है। देश 60 थेराप्यूटिक कैटेगरी में करीब 60,000 जेनेरिक ब्रांड तैयार करता है।
सेक्टर की वृद्धि में मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, निर्यात में बढ़ोतरी, विदेशी निवेश और सरकारी पहलों का अहम योगदान रहा है। इन कदमों ने आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक बाजार में भारत की उपस्थिति बढ़ाने में मदद की है।
साथ ही, दवाओं की अफोर्डेबिलिटी, नवाचार, गुणवत्ता मानक और रेगुलेटरी ओवरसाइट को बेहतर बनाने से पब्लिक हेल्थ के नतीजों में सुधार हुआ और भारतीय उत्पादों में वैश्विक भरोसा बढ़ा है।
हाल ही में यूरोपियन यूनियन, यूनाइटेड किंगडम और न्यूजीलैंड के साथ प्रस्तावित और संपन्न ट्रेड एग्रीमेंट से मार्केट एक्सेस और ट्रेड लिंकेज मजबूत हुए हैं, जिससे फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को और मजबूती मिली है।
भारत में USFDA द्वारा मंज़ूर किए गए सबसे ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, जो उत्पादों की सुरक्षा और गुणवत्ता पर वैश्विक भरोसा दर्शाते हैं। देश में लगभग 500 एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट मैन्युफैक्चरर हैं, जो वैश्विक API इंडस्ट्री में लगभग 8 प्रतिशत योगदान देते हैं।
वैक्सीन क्षेत्र में भारत एक प्रमुख वैश्विक सप्लायर है, जो DPT और BCG वैक्सीन की 40-70 प्रतिशत डिमांड पूरी करता है और WHO की मीज़ल्स वैक्सीन की जरूरत का 90 प्रतिशत प्रदान करता है। UNICEF को भी भारतीय उत्पादक लगभग 60 प्रतिशत वैक्सीन सप्लाई करते हैं।
2024-25 में फार्मा एक्सपोर्ट $30.5 बिलियन रहा, जो 2000-01 के $1.9 बिलियन से लगभग 16 गुना अधिक है, जो वैश्विक हेल्थकेयर सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।












