नई दिल्ली, 01 अप्रैल 2026।
देश में जनगणना-2027 के अंतर्गत दुनिया के सबसे बड़े प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभियान की औपचारिक शुरुआत बुधवार से हो गई है। केंद्र सरकार ने पहले चरण के रूप में मकानसूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य प्रारंभ किया है। इस बार पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है और पहली बार नागरिकों को स्वयं ऑनलाइन स्व-गणना करने की सुविधा भी दी गई है, जिससे वे अपने परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकें।
राष्ट्रीय परंपरा के अनुरूप राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सबसे पहले स्व-गणना कर इस अभियान का शुभारंभ किया। इसके पश्चात उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भी ऑनलाइन माध्यम से अपनी-अपनी गणना पूरी की। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए अपने परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करें और इसे सफल बनाएं।
गृह मंत्रालय के अनुसार, पहले चरण के तहत 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक देशभर में मकानसूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी। इस दौरान घरों की स्थिति, सुविधाएं, परिसंपत्तियां और बुनियादी ढांचे से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इस चरण के लिए कुल 33 प्रश्न निर्धारित किए गए हैं, जो साक्ष्य आधारित नीति निर्माण और लक्षित योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेंगे।
शुरुआती चरण में स्व-गणना की सुविधा आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की गई है, जिनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम और दिल्ली के नई दिल्ली नगरपालिका परिषद तथा दिल्ली छावनी क्षेत्र शामिल हैं। पहले ही दिन इन क्षेत्रों से लगभग 55 हजार परिवारों ने इस सुविधा का उपयोग किया, जो लोगों की बढ़ती जागरूकता और सहभागिता को दर्शाता है।
सरकार के मुताबिक स्व-गणना के लिए सुरक्षित वेब आधारित प्रणाली तैयार की गई है, जो 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। नागरिक अपने मोबाइल नंबर और बुनियादी पहचान जानकारी के माध्यम से पोर्टल पर प्रवेश कर फॉर्म भर सकते हैं। प्रक्रिया पूर्ण होने पर उन्हें एक विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान की जाती है, जिसे सत्यापन के समय प्रगणक को देना होगा।
डिजिटल व्यवस्था के साथ-साथ पारंपरिक पद्धति भी जारी रहेगी, जिसमें प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे। इस बार विशेष व्यवस्था के तहत घर-घर सर्वेक्षण से पहले 15 दिनों की अतिरिक्त अवधि स्व-गणना के लिए निर्धारित की गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें और प्रक्रिया को तेज व सटीक बनाया जा सके।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना अधिनियम 1948 के अंतर्गत एकत्रित सभी आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रहेंगे और उनका उपयोग केवल सांख्यिकीय व नीतिगत उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। डिजिटल प्रणाली में उच्च स्तरीय सुरक्षा उपाय अपनाए गए हैं, जिनमें मजबूत एन्क्रिप्शन और बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण शामिल है।
विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल तकनीक के समावेश से डेटा संग्रहण अधिक पारदर्शी, तेज और त्रुटिरहित होगा। इससे सरकार को लगभग वास्तविक समय के आंकड़े प्राप्त होंगे, जो योजनाओं और संसाधनों के बेहतर वितरण में सहायक सिद्ध होंगे।
जनगणना को शासन की आधारभूत प्रक्रिया माना जाता है, क्योंकि इसके आंकड़े आगामी वर्षों की विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी नीतियों के निर्माण का आधार बनते हैं। ऐसे में सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्व-गणना या प्रगणकों को सहयोग देकर इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएं।
इस प्रकार, जनगणना-2027 का डिजिटल और सहभागी स्वरूप देश में डेटा आधारित शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो समग्र विकास में सहायक साबित होगा।




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