भोपाल, 02 अप्रैल।
मध्य प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत गुरुवार को स्कूल शिक्षा केंद्र द्वारा ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया संपन्न की गई, जिसके माध्यम से एक लाख 6 हजार 051 बच्चों को उनकी पसंद के निजी स्कूलों में प्रवेश प्रदान किया गया। इनमें से 91 हजार 543 बच्चों को उनकी पहली पसंद वाले विद्यालय में ही सीट मिली। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए इसका सीधा प्रसारण भी किया गया।
राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने इस ऑनलाइन लॉटरी की शुरुआत करते हुए बताया कि यह व्यवस्था प्रदेश को देश में अग्रणी बनाती है। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के जरिए अभिभावकों को सरल और पारदर्शी तरीके से अपने क्षेत्र के निजी विद्यालयों में बच्चों के लिए निःशुल्क सीट आवंटित हो रही है। उन्होंने चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा इस व्यवस्था को सफल बनाने में विभाग और तकनीकी टीम की सराहना की।
उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष दस्तावेज सत्यापन के बाद कुल 1 लाख 78 हजार 714 बच्चे पात्र पाए गए थे, जिनमें से 1 लाख 6 हजार 051 बच्चों को स्कूल आवंटित किए गए हैं। इनमें 54 हजार 746 बालक और 51 हजार 305 बालिकाएं शामिल हैं। चयनित विद्यार्थियों को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर संदेश के माध्यम से सूचना दी जा रही है और वे 3 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच संबंधित विद्यालयों में प्रवेश ले सकेंगे। उनकी फीस सरकार द्वारा सीधे स्कूलों के खातों में जमा की जाएगी।
लॉटरी प्रक्रिया में नर्सरी कक्षा के लिए 66 हजार 219, केजी-1 के लिए 31 हजार 970 और पहली कक्षा के लिए 7 हजार 862 बच्चों को सीटें मिली हैं। इनमें अधिकांश बच्चों को उनकी प्राथमिक वरीयता के आधार पर स्कूल आवंटित किए गए, जबकि शेष को क्रमशः अन्य वरीयताओं के अनुसार स्थान मिला।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न श्रेणियों के पात्र बच्चों की जानकारी साझा करते हुए बताया गया कि सबसे अधिक आवेदन गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों के बच्चों के प्राप्त हुए। इसके साथ ही जिन बच्चों को पहले चरण में सीट नहीं मिल पाई है, उन्हें दूसरे चरण में रिक्त सीटों के आधार पर पुनः अवसर दिया जाएगा।
इस ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान राज्य शिक्षा केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी सहयोगी विभाग के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।











