भोपाल, 19 अप्रैल
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को भगवान परशुराम की जन्मस्थली जानापाव (महू) में आयोजित ‘परशुराम प्रकटोत्सव’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस अवसर पर वे भगवान परशुराम मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की समृद्धि और खुशहाली की कामना करेंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से दोपहर 1:15 बजे जानापाव पहुंचेंगे और आयोजन में सहभागिता करेंगे। यहां वे महाभारतकालीन अस्त्र-शस्त्रों और चक्रव्यूह की कला पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही वे स्थानीय सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होकर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित भी करेंगे।
आयोजन में संस्कृति विभाग और श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के संयुक्त प्रयास से भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें कला और भक्ति का संगम देखने को मिलेगा। कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक सवई भट्ट अपने दल के साथ भक्ति संगीत की प्रस्तुति देंगे। वहीं पंडित विजय शंकर मेहता द्वारा रचित और वीरेंद्र कुमार के निर्देशन में ‘परशुराम नाट्य लीला’ का मंचन भी किया जाएगा, जो भगवान परशुराम के जीवन और व्यक्तित्व को दर्शाएगा। इस कार्यक्रम में आमजन के लिए प्रवेश नि:शुल्क रखा गया है।
कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री दोपहर 1:40 बजे धार के लिए प्रस्थान करेंगे और बाद में अपराह्न 3:55 बजे इंदौर एयरपोर्ट पहुंचेंगे। इंदौर प्रवास के दौरान वे भगवान परशुराम की शोभायात्रा में शामिल होंगे और अन्य स्थानीय कार्यक्रमों में भी भाग लेंगे।
जानापाव में भगवान परशुराम की जन्मस्थली पर भव्य श्रीपरशुराम-श्रीकृष्ण लोक का निर्माण कार्य भी जारी है। लगभग 17.41 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रहे इस परियोजना का उद्देश्य भगवान परशुराम और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, दर्शन और संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है, जिससे यह स्थान एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हो सके।
इस परिसर में भगवान परशुराम और श्रीकृष्ण की कांस्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। साथ ही 30 फीट ऊंचा भव्य द्वार पत्थर और धातु से तैयार किया जाएगा। यहां कथा मंच, गजीबो, व्यू पाइंट, लैंडस्केपिंग और पाथ-वे सहित विभिन्न विकास कार्य किए जाएंगे।
इसके अलावा श्रीपरशुराम-श्रीकृष्ण लोक में एक भव्य संग्रहालय का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन और पौराणिक महत्व को दर्शाया जाएगा। इस परिसर में शस्त्र, उत्पत्ति, स्वरूप, संतुलन और ध्यान से संबंधित पांच दीर्घाएं विकसित की जाएंगी, जिनमें भगवान परशुराम और श्रीकृष्ण की विविध कलाओं का प्रदर्शन किया जाएगा।










