कोटा, 02 अप्रैल।
पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल का 74वां स्थापना दिवस मेनाल ऑफिसर्स क्लब में बड़े उत्साह और गरिमापूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर रेलवे प्रदर्शनी, रेल सेवा पुरस्कार समारोह और अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का भव्य संयोजन किया गया। प्रदर्शनी में कोटा के हजारों नागरिक, विद्यार्थी और परिवारजन शामिल हुए और रेलवे की आधुनिक तकनीक और उपलब्धियों का अनुभव किया।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि मंडल रेल प्रबंधक अनिल कालरा ने प्रदर्शनी का विधिवत उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद उन्होंने मीडिया से वार्ता करते हुए मंडल की 74 वर्षीय यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। अनिल कालरा और महिला कल्याण संगठन की अध्यक्षा अंशु कालरा ने महिला सदस्यों के साथ विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर रेलवे की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया।
प्रदर्शनी प्रातः ग्यारह बजे से रात्रि दस बजे तक खुली रही और इसमें वाणिज्य, परिचालन, कार्मिक, रेलवे सुरक्षा बल, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, गति शक्ति यूनिट, निर्माण, सिग्नल एवं दूरसंचार, ट्रैक्शन रोलिंग स्टॉक शेड टीकेडी, ट्रैक्शन वितरण, ट्रैक्शन रोलिंग ऑपरेशन, यांत्रिक और विद्युत विभाग समेत 13 स्टॉल लगाए गए। प्रत्येक स्टॉल पर डिजिटल स्क्रीन, कार्यशील मॉडल्स और इंटरैक्टिव प्रदर्शनों के माध्यम से रेलवे की कार्यप्रणाली को सरल और रोचक तरीके से दिखाया गया। कवच 4.0, अमृत भारत स्टेशन योजना, 2×25 केवी ओएचई विद्युतीकरण, हाई स्पीड ट्रायल्स, रेल मदद ऐप और रेलवन ऐप जैसी आधुनिक उपलब्धियाँ प्रदर्शित की गईं।
विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने अपने परिवारजनों के साथ प्रदर्शनी का भ्रमण कर तकनीक और सुरक्षा उपायों की जानकारी प्राप्त की। राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इसे ज्ञानवर्धक और प्रेरणास्पद बताया। बच्चों और युवाओं के लिए विशेष सेल्फी प्वाइंट की व्यवस्था की गई थी, जिससे उनमें उत्साह देखने को मिला।
70वें रेल सेवा पुरस्कार सप्ताह के अंतर्गत कुल 41 समर्पित कर्मचारियों को उनकी निष्ठा और उत्कृष्ट सेवाभाव के लिए सम्मानित किया गया। इसके साथ ही अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक उत्सव का रूप दिया। देशभर से आए वरिष्ठ कवियों जैसे जगदीश सोलंकी, सुरेन्द्र यादवेन्द्र, रावजात शत्रु, निशामुनि गौड़ और सलोनी राणा ने अपनी काव्य-रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया और स्थापना दिवस को यादगार संध्या में बदल दिया।












