भोपाल, 21 अप्रैल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लेंसकार्ट शोरूम से जुड़ा ड्रेस कोड विवाद अब तेज होता नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पर सामने आई एक कथित गाइडलाइन के बाद मंगलवार को न्यू मार्केट रोशनपुरा स्थित शोरूम के बाहर हिंदू उत्सव समिति के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने शोरूम के कर्मचारियों को तिलक लगाते हुए मंत्रोच्चार के साथ उनके हाथों में कलावा भी बांधा। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि संगठन लेंसकार्ट के बहिष्कार की अपील कर रहा है। उनका कहना है कि देश में तिलक, कलावा और बिंदी जैसे धार्मिक प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए और इनके खिलाफ किसी भी तरह की नीति स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सनातन धर्म से जुड़े प्रतीकों का अपमान किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने कंपनियों को चेतावनी दी कि भले ही कंपनी के सीईओ पीयूष बंसल ने माफी मांगी हो, लेकिन संगठन इससे संतुष्ट नहीं है और विरोध जारी रहेगा।
मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिल आनंद ने भी इस कथित गाइडलाइन पर नाराजगी जताते हुए इसे तुगलकी फरमान बताया। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को सिंदूर और कलावा पहनकर आने से रोकने जैसी बातें सही हैं, तो यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। उनका कहना था कि भारत की पहचान उसकी सांस्कृतिक परंपराओं और सनातन मूल्यों से है और इनका सम्मान हर हाल में किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब देश गंगा-जमुनी तहजीब के साथ चलता है, तो किसी भी संस्था को किसी धर्म विशेष को प्रभावित करने वाले नियम लागू करने का अधिकार नहीं है।
शोरूम के बाहर बढ़ते विरोध और भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और अधिकारियों द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है। प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने की समझाइश दी जा रही है।
इधर, शोरूम के कर्मचारी मनीष भमारे ने लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्हें कभी भी तिलक या कलावा पहनने से नहीं रोका गया। उन्होंने बताया कि वे स्वयं नवरात्रि जैसे अवसरों पर तिलक और कलावा लगाकर कार्यस्थल पर आए हैं और कंपनी की ओर से इस प्रकार की कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें किसी तरह का दबाव नहीं है और सोशल मीडिया पर चल रही बातें व्यक्तिगत राय हो सकती हैं, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है।
दरअसल, यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक कथित पॉलिसी दस्तावेज वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि कर्मचारियों को तिलक, बिंदी और कलावा जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने से रोका गया है, जबकि हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। इस कथित भेदभाव को लेकर मामला तेजी से बढ़ा और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। हालांकि विवाद बढ़ने पर कंपनी के सीईओ ने माफी मांगते हुए कहा कि कंपनी सभी धर्मों का सम्मान करती है और कर्मचारियों को अपने धार्मिक प्रतीक धारण करने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन इसके बावजूद विरोध कर रहे संगठन संतुष्ट नहीं हैं और आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।








