लोकसभा ने अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी बनाने संबंधी विधेयक को पारित कर दिया, जिसे कई दलों का समर्थन मिला जबकि विपक्ष ने विरोध जताया।
अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी के रूप में स्थापित करने से जुड़ा ‘आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026’ बुधवार को लोकसभा में पारित हो गया। इस विधेयक को भारतीय जनता पार्टी के साथ तेलुगु देशम पार्टी और कांग्रेस का समर्थन मिला, जबकि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने इसका विरोध करते हुए सदन से बहिर्गमन किया।
विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद मनिकम टेगौर ने कहा कि उनकी पार्टी इस प्रस्ताव का समर्थन करती है, लेकिन साथ ही उन्होंने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि यह दर्जा राज्य के समग्र विकास और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।
वहीं वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सांसद पीवी मिधुन रेड्डी ने कहा कि अमरावती को राजधानी बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा करीब 34 हजार एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई थी। प्रभावित लोगों को विकसित भूखंड, आवास और बच्चों की शिक्षा का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक इन वादों को पूरा नहीं किया गया है।
रेड्डी ने आरोप लगाया कि तत्कालीन टीडीपी सरकार ने इतनी बड़ी राजधानी परियोजना के लिए वित्तीय संसाधनों की स्पष्ट योजना नहीं बनाई। उन्होंने कहा कि सरकार एक विशाल राजधानी विकसित करने की बात कर रही है, लेकिन इसके लिए धन की व्यवस्था स्पष्ट नहीं है।
वाईएसआरसीपी सदस्य ने वर्ष 2019 से 2024 के दौरान अपनी पार्टी की सरकार द्वारा तीन राजधानियों के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि यह विचार नया नहीं है और विश्व के कई देशों में ऐसे उदाहरण मौजूद हैं।
विधेयक पारित होने के बाद आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश गुरुवार को दिल्ली में राज्यसभा की कार्यवाही देखने पहुंचेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर राज्य की जनता की ओर से आभार प्रकट करेंगे। इस विधेयक का उद्देश्य अमरावती के विकास को गति देना और पुनर्गठन से जुड़े लंबित मुद्दों का समाधान करना है, जिसे सत्ता पक्ष ने ऐतिहासिक कदम बताया है।











