भोपाल, 20 अप्रैल।
मध्य प्रदेश में जल संरक्षण की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में एक बड़ी क्रांति आकार ले रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि पानी बचाना न केवल समय की मांग है, बल्कि यह हमारी सामाजिक नैतिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ियों के लिए प्रकृति के इस वरदान को सुरक्षित रखना अनिवार्य है, जिसके लिए वर्तमान जल स्रोतों के पुनर्जीवन और संरक्षण पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेशव्यापी 'जल गंगा संवर्धन अभियान' एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसमें सरकार और समाज की साझा भागीदारी से महज एक माह में ही अद्भुत सफलताएं मिली हैं।
इस अभियान की सफलता का प्रमाण राष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश की बढ़ती साख है। मुख्यमंत्री के प्रयासों से मध्य प्रदेश अब जल संरक्षण की राष्ट्रीय रैंकिंग में छठे स्थान से छलांग लगाकर तीसरे पायदान पर पहुंच गया है। राज्य सरकार द्वारा 30 जून तक संचालित इस विशेष अभियान में 16 अलग-अलग विभागों की 58 गतिविधियां शामिल हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 6 हजार 278 करोड़ रुपये का वित्तीय लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके तहत 2 लाख 44 हजार से अधिक जल संवर्धन कार्यों को मूर्त रूप दिया जा रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर अभियान की पारदर्शिता और गति बनाए रखने के लिए एक एकीकृत डैश बोर्ड के माध्यम से निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। आयुक्त मनरेगा के अनुसार, इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जिलों की रैंकिंग तय हो रही है, जिससे विभागों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत विभाग ने शानदार उपलब्धि हासिल करते हुए लगभग 40 हजार खेत तालाबों और 59 हजार से अधिक कूप-रीचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया है। साथ ही, 21 हजार से ज्यादा पुरानी जल संरचनाओं को नया जीवन दिया गया है और अमृत सरोवरों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
नगरीय निकायों में भी पुराने कुओं, बावड़ियों के जीर्णोद्धार और रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। जन अभियान परिषद के माध्यम से 5 लाख से अधिक लोगों को जागरूक किया गया है और प्रदेशभर में 2,682 जल मंदिर स्थापित किए गए हैं। शिक्षा विभाग भी स्कूली छात्र-छात्राओं के बीच रैलियों और प्रतियोगिताओं के जरिए इस संदेश को घर-घर पहुंचा रहा है। तकनीकी नवाचार के तहत मोबाइल ऐप आधारित ट्रैकिंग और रीयल टाइम मॉनिटरिंग से कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा रही है, जिससे मध्य प्रदेश का यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन गया है।










