दिल्ली, 18 मार्च।
आधुनिक जीवन में बैटरी का महत्व बेहद बड़ा है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, घड़ियों से लेकर वाहनों और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तक रोजमर्रा की जिंदगी में बैटरियों का व्यापक उपयोग होता है। आज के दौर में बैटरी के बिना आधुनिक जीवन की कल्पना करना लगभग असंभव है।
बैटरी के इतिहास में 20 मार्च की तारीख विशेष महत्व रखती है। इसी दिन इटली के महान वैज्ञानिक अलेसेंड्रो वोल्टा ने दुनिया को अपनी उस खोज से परिचित कराया, जिसने बिजली उत्पादन की दिशा में नई राह खोली।
वोल्टा ने अपने प्रयोग के जरिए यह साबित किया कि रासायनिक और भौतिक प्रक्रियाओं की मदद से बिजली उत्पन्न की जा सकती है। उन्होंने तांबे और जिंक की छड़ों को कांच के दो मर्तबानों में रखा और उन्हें नमक के पानी में भीगे तार से जोड़ा। इस प्रयोग से यह सिद्ध हुआ कि धातुओं और रासायनिक घोल के संयोजन से विद्युत धारा पैदा की जा सकती है।
उनकी इसी खोज को आगे चलकर आधुनिक बैटरी के विकास की आधारशिला माना गया। बाद में इसी सिद्धांत के आधार पर “वोल्टाइक पाइल” का विकास हुआ, जिसे दुनिया की पहली व्यावहारिक बैटरी माना जाता है।
आज बिजली से चलने वाले लगभग हर छोटे-बड़े उपकरण में किसी न किसी रूप में बैटरी का उपयोग किया जाता है। वैज्ञानिकों की इस ऐतिहासिक खोज ने न केवल तकनीकी विकास को नई गति दी, बल्कि आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युग की नींव रखने में भी अहम भूमिका निभाई।












