पश्चिमी सिंहभूम, 01 अप्रैल।
पश्चिमी सिंहभूम जिले के मेघाहातुबुरु क्षेत्र में बुधवार को झारखंड मजदूर संघर्ष संघ की स्थानीय इकाई के बैनर तले श्रमिकों का गुस्सा उफान पर था। महासचिव आफताब आलम के नेतृत्व में बड़ी संख्या में मजदूरों ने सेल (भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड) प्रबंधन के खिलाफ जनरल कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया और महाप्रबंधक (मानव संसाधन) अमित विश्वास को अपनी मांगों से संबंधित विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों ने जोर देकर कहा कि सेस्बीएफ (सेल कर्मचारी अधिवर्षिता लाभ कोष) उनकी कठोर कमाई है और इसे किसी भी परिस्थिति में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में जबरन नहीं स्थानांतरित किया जा सकता। उन्होंने बताया कि यह एक ट्रस्ट आधारित कोष है, जिसमें कर्मचारियों के वेतन से प्रतिमाह दो प्रतिशत राशि काटी जाती है और सेवानिवृत्ति के समय पूरी राशि ब्याज सहित वापस दी जाती है।
मजदूरों ने 5 मार्च 2026 को जारी सर्कुलर पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि 1 अप्रैल 2026 से ट्रस्ट को समाप्त करने का निर्देश दिया गया है, लेकिन जमा राशि के भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उनका आरोप था कि प्रबंधन कर्मचारियों की सहमति के बिना इसे राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में स्थानांतरित करने की तैयारी कर रहा है, जो कानून और ट्रस्ट नियमों का उल्लंघन है।
आफताब आलम ने स्पष्ट किया कि सेस्बीएफ एक अपरिवर्तनीय ट्रस्ट है, जिसे किसी बोर्ड या प्रशासनिक निर्णय से बंद नहीं किया जा सकता। यदि इसे बंद किया गया तो सभी कर्मचारियों को उनकी जमा राशि ब्याज सहित वापस करनी अनिवार्य है। उन्होंने प्रबंधन से ट्रस्ट डीड की प्रमाणित प्रति, कोष की वर्तमान स्थिति और पूरी वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान ठेका मजदूरों ने भी अपनी समस्याओं को उठाया। उन्होंने समान कार्य के लिए समान वेतन, पदोन्नति के अवसर, स्थानीय बेरोजगारों को प्राथमिकता, मेघाहातुबुरु ओपीडी में नियमित चिकित्सक और फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ की नियुक्ति और राउरकेला रेफर किए जाने वाले मरीजों के लिए वातानुकूलित एंबुलेंस की मांग की।
मजदूर नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया और सेस्बीएफ की राशि कर्मचारियों को वापस नहीं की गई, तो आंदोलन को आने वाले दिनों में और व्यापक किया जाएगा।













