कुशीनगर, 03 अप्रैल 2026।
कुशीनगर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध कॉन्क्लेव 2026 का समापन बड़े उत्साह और निवेश की संभावनाओं के साथ हुआ। तीन दिवसीय इस आयोजन में कुल 2,300 प्रतिनिधियों के अलावा 300 से अधिक विदेशी मेहमान भी शामिल हुए। कार्यक्रम ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक बौद्ध पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया।
भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल पर हुए इस सम्मेलन में मुख्य रूप से भिक्षु, विद्वान, नीति-निर्माता और विशेषज्ञ शामिल थे। थाईलैंड, जापान, म्यांमार, भूटान और नेपाल सहित कई देशों से आए विदेशी मेहमानों ने भी इस कॉन्क्लेव में भाग लिया। आयोजन में शामिल प्रतिनिधियों की संख्या और विभिन्न देशों से आने वाले मेहमानों ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बना दिया।
कॉन्क्लेव के दौरान पर्यटन और संबंधित क्षेत्रों में लगभग 3,000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं उभरीं। होटल, रिजॉर्ट, रियल एस्टेट, बायो-सीएनजी और फूड प्रोसेसिंग जैसे उद्योगों ने कुशीनगर में निवेश की रूचि दिखाई। दो नए टाउनशिप विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई, जो शहर के समग्र विकास को नई दिशा दे सकती है।
सम्मेलन में बौद्ध पर्यटन को केवल तीर्थयात्रा तक सीमित न रखते हुए इसे सांस्कृतिक आदान-प्रदान, स्थानीय कारोबार और सतत विकास से जोड़ने पर जोर दिया गया। कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की बेहतर कनेक्टिविटी को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया, जिससे विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि की संभावना दिखाई दे रही है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि कुशीनगर बौद्ध कॉन्क्लेव ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक बौद्ध पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने में मदद की है। देश-विदेश से आए निवेशक और प्रतिनिधियों की भागीदारी यह दर्शाती है कि कुशीनगर अब न केवल आस्था, बल्कि निवेश का भी आकर्षक गंतव्य बन चुका है।
मंत्री ने बताया कि इस आयोजन से लगभग 3,000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं सामने आई हैं, जिससे पर्यटन, होटल, परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी आएगी और स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। राज्य सरकार निवेश प्रस्तावों को शीघ्र जमीन पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि कुशीनगर के समग्र विकास को नई गति मिले।
अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट लगातार मजबूत हो रहा है। 2025 में प्रदेश के छह प्रमुख बौद्ध स्थलों पर 82 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे, जो इस क्षेत्र की बढ़ती लोकप्रियता का संकेत है।




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