नई दिल्ली, 23 मई।
भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर महत्वपूर्ण कमी दर्ज की गई है। नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 15 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 8.94 बिलियन डॉलर की गिरावट के साथ 688.89 बिलियन डॉलर के स्तर पर आ गया है। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में निरंतर हो रही वृद्धि के कारण भारतीय मुद्रा (रुपये) पर भारी दबाव बना हुआ है। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) को बाजार में हस्तक्षेप करते हुए डॉलर की बिक्री करनी पड़ी है।
रुपये में आ रही तेज गिरावट को थामने और बैंकिंग प्रणाली में तरलता (लिक्विडिटी) सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, केंद्रीय बैंक ने 26 मई 2026 के लिए 5 बिलियन डॉलर के 'यूएसडी/आईएनआर बाय-सेल स्वैप' ऑक्शन की घोषणा की है। इस रणनीतिक कदम के तहत, व्यावसायिक बैंक रिज़र्व बैंक को डॉलर बेचेंगे और तीन साल की समयावधि के बाद उन्हें वापस खरीदने का अनुबंध करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपाय रुपये के मूल्य को मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बनाए रखने में सहायक होगा।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफपीआई) द्वारा पूंजी निकासी के कारण रुपये का मूल्य अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96-97 के स्तर तक पहुँच गया था। इस चुनौती को देखते हुए, सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार के संरक्षण हेतु नागरिकों से गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं में कटौती करने, ईंधन की खपत कम करने और स्वर्ण की खरीद को सीमित करने का आग्रह किया है। रिज़र्व बैंक की यह समग्र रणनीति बाजार में व्याप्त अस्थिरता को कम करने और आर्थिक स्थिरता को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है।






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