नई दिल्ली, 8 जुलाई।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने 'एल नीनो' के संभावित असर और इससे निपटने की तैयारियों को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा की अध्यक्षता में सेवा तीर्थ में आयोजित इस बैठक में पंद्रह से अधिक मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए कि राज्यों के साथ मिलकर मानसून की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। उन्होंने संकटग्रस्त जिलों में पीने का पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने और जलाशयों के जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने पर विशेष जोर दिया।
बैठक में मौसम विभाग ने जून और जुलाई में बारिश की स्थिति और एल नीनो के प्रभाव पर प्रस्तुति दी। विभाग ने बताया कि जुलाई और अगस्त में इसके कमजोर से मध्यम स्तर पर रहने का अनुमान है।
कृषि सचिव ने खरीफ सीजन की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्यों के साथ फसल-मौसम निगरानी समूह की साप्ताहिक बैठकें की जा रही हैं। साथ ही 262 कमजोर जिलों के लिए कृषि आकस्मिक योजनाएं अपडेट कर दी गई हैं और फसल बीमा योजना व किसान क्रेडिट कार्ड अभियान भी शुरू किए गए हैं।
पशुपालन विभाग को सूखे और हरे चारे की उपलब्धता का आकलन करने का निर्देश दिया गया है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने वर्तमान स्थिति को स्थिर बताया है, वहीं जल संसाधन विभाग ने भूजल और जलाशयों की स्थिति साझा की। स्वास्थ्य मंत्रालय ने हीट वेव, नमी और डेंगू से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसे जमीनी स्तर तक पहुँचाया जा रहा है।
उपभोक्ता मामलों और उर्वरक विभाग को आवश्यक वस्तुओं व उर्वरक की आपूर्ति पर निगरानी रखने को कहा गया। ग्रामीण विकास विभाग ने 'विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन' के कार्यों की जानकारी दी। कृषि अनुसंधान विभाग ने जलवायु-अनुकूल बीजों के प्रसार की बात कही, जबकि बिजली विभाग ने उत्पादन और उपलब्धता की स्थिति स्पष्ट की।











