जकार्ता, 08 जुलाई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित कर इतिहास रच दिया है। वे ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं। जकार्ता में सांसदों के सामने अपने संबोधन में उन्होंने भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों के एक नए युग का आह्वान किया। उन्होंने भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए दोनों देशों के साझा मूल्यों और भविष्य की साझा दृष्टि पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया सदियों पुराने इतिहास, समुद्री संबंधों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जुड़े हुए हैं। उन्होंने 2000 साल से अधिक पुराने सभ्यतागत जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि विचार, व्यापार और विश्वास ने ही दोनों देशों के बीच संबंधों की नींव रखी है। उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम और इंडोनेशिया के राष्ट्रीय आदर्श वाक्य का उल्लेख करते हुए कहा कि ये मूल्य आज भी हमारी साझेदारी को दिशा दे रहे हैं।
दोनों देशों के साझा विकास और लोगों की आकांक्षाओं ने उन्हें रणनीतिक रूप से करीब ला खड़ा किया है। मोदी ने विकसित भारत 2047 और गोल्डन इंडोनेशिया 2045 के लक्ष्यों के बीच तालमेल पर प्रकाश डाला। उन्होंने व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, खाद्य सुरक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और गहरा करने की वकालत की।
अंत में, प्रधानमंत्री ने ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती देने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने एक मुक्त, समावेशी और नियमों पर आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत और इंडोनेशिया के मिलकर काम करने पर भी जोर दिया।











