काठमांडू, 08 जुलाई।
नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) ने अपने सांसदों की संसदीय गतिविधियों पर लगाम कसने की तैयारी कर ली है। पार्टी ने नया फरमान जारी करते हुए सांसदों के लिए संसद में बोलने से पहले अपना स्पीच नोट पार्टी पदाधिकारियों को जमा करना अनिवार्य कर दिया है। यह कदम पार्टी की ओर से संसद में प्रस्तुति को और अधिक व्यवस्थित बनाने के नाम पर उठाया गया है।
मुख्य सचेतक क्रान्तिशिखा धिताल ने स्पष्ट किया है कि शून्य और विशेष समय में अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने के लिए यह व्यवस्था जरूरी है। अब पार्टी के सांसदों को अपनी सामग्री एक दिन पहले मुख्य सचेतक और सचेतक प्रकाशचन्द्र परियार के पास भेजना होगा। इस नए निर्देश के बाद से पार्टी के भीतर ही विशेषाधिकारों के हनन के सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरएसपी के भीतर पनप रहे मतभेदों और सरकार के खिलाफ सांसदों के बागी तेवरों को दबाने के लिए यह एक-द्वार नीति अपनाई गई है। हाल ही में कुछ सांसदों ने सरकार की कार्यप्रणाली और गृहमंत्री के इस्तीफे को लेकर तीखे सवाल उठाए थे, जिसके बाद यह आदेश चर्चा का विषय बन गया है।
पार्टी के भीतर स्पष्ट तौर पर तीन गुटों के उभरने की खबरें भी सामने आ रही हैं। मुख्य सचेतक द्वारा सरकार की विफलताओं पर नाराजगी जताने के तुरंत बाद इस प्रकार का आदेश जारी करना, पार्टी के भीतर मचे आंतरिक घमासान और नियंत्रण की कोशिश को दर्शाता है।











