23 मार्च
महासागरों का तापमान पृथ्वी को बड़े स्तर पर फैलने वाले सूखे से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, महासागरीय चक्र जैसे एल नीनो वैश्विक स्तर पर एक साथ सूखा पड़ने से रोकने में मदद कर रहे हैं और इससे खाद्य आपूर्ति भी सुरक्षित बनी रहती है। विस्तृत विश्लेषण में यह पाया गया कि पिछले एक सदी से अधिक के जलवायु आंकड़ों के आधार पर सूखा आमतौर पर पूरे विश्व में एक साथ नहीं फैलता। वैश्विक स्तर पर एक ही समय में केवल 1.8% से 6.5% भूमि ही सूखे से प्रभावित होती है। महासागरीय पैटर्न अलग-अलग क्षेत्रों में सूखे की स्थिति को अलग-अलग समय पर उत्पन्न करते हैं।
वैज्ञानिकों ने समुद्री तापमान के पैटर्न का अध्ययन किया और यह निर्धारित किया कि सूखा कितने बड़े क्षेत्र में फैलता है। 1901 से 2020 तक के जलवायु आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि एक साथ होने वाले सूखे आमतौर पर पृथ्वी की केवल 1.8% से 6.5% भूमि को प्रभावित करते हैं। शोध में यह भी देखा गया कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सूखा कब शुरू होता है और क्या ये घटनाएं एक ही समय पर होती हैं। कई प्रमुख कृषि क्षेत्रों में मध्यम सूखे से फसल उत्पादन पर गंभीर असर पड़ता है, जैसे गेहूं, चावल, मक्का और सोयाबीन में 25% से 50% तक नुकसान की संभावना होती है।
हालांकि यदि कई कृषि क्षेत्रों में एक साथ सूखा पड़ जाए, तो गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है, लेकिन प्राकृतिक जलवायु प्रक्रियाएं इस स्थिति को बनने से रोकती हैं। महासागर के तापमान में बदलाव, विशेषकर प्रशांत महासागर में, यह तय करते हैं कि सूखा कितने बड़े क्षेत्र में फैलेगा। एल नीनो और ला नीना जैसे महासागरीय चक्र वैश्विक सूखे के पैटर्न को प्रभावित करते हैं। वर्षा और तापमान मिलकर सूखे की तीव्रता को प्रभावित करते हैं, जिसमें दो-तिहाई प्रभाव वर्षा और शेष एक-तिहाई तापमान के कारण होता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक खाद्य आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए संभावित सूखा प्रभावित क्षेत्रों पर पहले से ध्यान देना और उचित तैयारी करना जरूरी है।

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