नई दिल्ली, 03 अप्रैल 2026।
संसद के दोनों सदनों से पारित जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 को देश में व्यापार और जीवन यापन को आसान बनाने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है। यह विधेयक विश्वास आधारित प्रशासन को बढ़ावा देते हुए व्यक्तियों और उद्यमों पर अनुपालन संबंधी बोझ को कम करने की मंशा को दर्शाता है।
इस विधेयक के अंतर्गत 23 मंत्रालयों द्वारा संचालित 79 केंद्रीय कानूनों के कुल 784 प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं। इनमें से 717 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है, जबकि 67 प्रावधानों में जीवन को सरल बनाने के लिए संशोधन किए गए हैं। इसका उद्देश्य नियामक ढांचे को अधिक संतुलित और अनुकूल बनाना है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए बदलावों में औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, फार्मेसी अधिनियम, खाद्य सुरक्षा कानून, क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट अधिनियम और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा आयोग अधिनियम जैसे प्रमुख कानून शामिल हैं। इन संशोधनों का उद्देश्य जन स्वास्थ्य की सुरक्षा बनाए रखते हुए प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।
विधेयक की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि छोटे प्रक्रियात्मक उल्लंघनों के लिए कारावास के स्थान पर आर्थिक दंड लागू किए गए हैं। इससे गंभीर मामलों में कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी, जबकि सामान्य मामलों में आसान समाधान संभव होगा।
औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम में संशोधन कर न्यायनिर्णय की नई व्यवस्था लागू की गई है, जिससे मामूली मामलों का निपटारा न्यायालय के बाहर ही संभव हो सकेगा। दस्तावेजों के रखरखाव या सूचना न देने जैसे मामलों को अब नागरिक दंड प्रणाली के तहत हल किया जाएगा।
इसी प्रकार अन्य कानूनों में भी दंड व्यवस्था को आधुनिक बनाया गया है, जिससे जवाबदेही बढ़े और प्रक्रियाएं स्पष्ट हों। खाद्य सुरक्षा कानून में प्रवर्तन को सरल बनाते हुए दंड को अपराध की प्रकृति के अनुसार निर्धारित किया गया है।
क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट अधिनियम में भी बदलाव कर ऐसे मामलों में आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है, जहां रोगी की सुरक्षा को तत्काल खतरा नहीं होता। इससे सुधारात्मक उपायों को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार का मानना है कि इन सुधारों से अदालतों पर भार कम होगा, मुकदमेबाजी घटेगी और अनुपालन से जुड़े मामलों का त्वरित समाधान संभव होगा। साथ ही यह कदम विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हितधारकों के लिए स्पष्टता और संतुलन प्रदान करेगा।




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