वाराणसी, 20 मार्च।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और मानवशास्त्रीय सर्वेक्षण भारत (एएनएसआई) के संयुक्त तत्वावधान में 23 और 24 मार्च 2026 को पेलियोजीनोमिक्स पर दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इस संगोष्ठी का उद्देश्य प्राचीन डीएनए, पैलियोएंथ्रोपोलॉजी, गट माइक्रोबायोम और पॉपुलेशन जीनोमिक्स से जुड़े शोध कार्यों को एक मंच पर लाना है।
कार्यशाला के दौरान मानव विकास के इतिहास और उससे जुड़े रहस्यों पर विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श होगा। एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के निदेशक प्रो. बी.वी. शर्मा ने बताया कि यह संगोष्ठी भारत में मानव इतिहास और विकास को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य अनुसंधान प्राथमिकताओं की पहचान करना, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना और एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सहयोगी परियोजना की नींव रखना है।
आयोजन में दक्षिण एशिया में प्रागैतिहासिक मानव आबादी के प्रवास, अनुकूलन और जनसांख्यिकीय इतिहास के पुनर्निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही आधुनिक मानव स्वास्थ्य और विकासवादी संदर्भों को समझने पर भी चर्चा होगी। कार्यक्रम में देश के प्रमुख विशेषज्ञ जैसे पद्मश्री डॉ. के. थंगराज, डॉ. वी.एन. प्रभाकर, प्रो. वसंत शिंदे, डॉ. माधुसूदन आर. नंदिनेणी और डॉ. नवीन गांधी शामिल होंगे।
विभिन्न सत्रों में जैविक मानवशास्त्र, माइक्रोबियल जीनोमिक्स, प्राचीन डीएनए की तकनीकी चुनौतियां, पैलियोएंथ्रोपोलॉजी और पुरातात्विक दृष्टिकोण पर पैनल चर्चाएं आयोजित होंगी। कार्यक्रम के समन्वयक जीन विज्ञानी प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि यह पहल पुरातत्व, मानवशास्त्र और आधुनिक जीनोमिक्स को जोड़कर दक्षिण एशिया और विश्व के मानव विकास के रहस्यों को समझने में सहायक साबित होगी।












