अमेरिका, 10 अप्रैल 2026।
अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने मौजूदा संघर्ष विराम को बेहद कमजोर बताते हुए कहा कि इससे हालात और बिगड़ सकते हैं और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा सुरक्षा पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति को लेकर चिंता जताई और कहा कि यहां की अनिश्चितता अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति को बाधित कर सकती है। उनका मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम से वैश्विक आर्थिक संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
जॉन केरी ने यह भी आरोप लगाया कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लंबे समय से अमेरिका को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की ओर प्रेरित करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और जो बाइडेन ने इस तरह के प्रस्तावों को पहले अस्वीकार कर दिया था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में स्थिति अलग दिखाई दे रही है।
एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कहा कि वर्तमान संघर्ष विराम की स्थिति बेहद नाजुक है और यह किसी भी समय अस्थिर हो सकती है। उन्होंने इसे ढीला-ढाला बताते हुए इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाए।
पूर्व विदेश मंत्री ने अपने अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि ईरान के साथ 2015 में हुए परमाणु समझौते ने उसकी क्षमताओं को सीमित रखने में भूमिका निभाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि उस समझौते से अलग होने का निर्णय आगे चलकर तनाव बढ़ाने का कारण बना।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह स्थिति आगे बढ़ती है तो इसके परिणाम बेहद खतरनाक हो सकते हैं। उनके अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव इतना व्यापक हो सकता है, जैसा पहले कभी देखने को नहीं मिला।
तेल परिवहन के महत्वपूर्ण मार्ग होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर उन्होंने कहा कि संघर्ष विराम के बावजूद यहां तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित रही है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की रणनीति में स्पष्टता की कमी नजर आती है। उनका मानना है कि कूटनीतिक स्तर पर मौजूद कमियों के कारण वैश्विक स्तर पर गलत संदेश जा रहा है, जिससे शांति प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं।











