प्रधानमंत्री ने नौ संकल्पों के माध्यम से जल संरक्षण, पर्यावरण, स्वदेशी उत्पाद, प्राकृतिक खेती और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की, जिससे आत्मनिर्भर और सतत विकासशील भारत का निर्माण हो सके।
17 अप्रैल।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से नौ महत्वपूर्ण संकल्प लेने का आग्रह किया, जो न केवल व्यक्तिगत जीवनशैली में सुधार लाने का संदेश देते हैं, बल्कि राष्ट्र के सतत विकास और सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूत करते हैं। यह आह्वान मांड्या जिले के श्री क्षेत्र आदि चुंचनगिरी मठ में एक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान किया गया, जहां उन्होंने गुरु परंपरा का सम्मान करते हुए समाज को दिशा देने वाले विचार प्रस्तुत किए।
प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। आज के समय में जल संकट एक वैश्विक चुनौती बन चुका है। भारत जैसे विशाल और जनसंख्या-बहुल देश में जल संसाधनों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे वर्षा जल संचयन, जल का सीमित उपयोग और जल स्रोतों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें। यह केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि जनभागीदारी से ही इसे सफल बनाया जा सकता है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रधानमंत्री ने “एक पेड़ मां के नाम” लगाने का भावनात्मक संदेश दिया। यह पहल न केवल वृक्षारोपण को बढ़ावा देगी, बल्कि लोगों को प्रकृति से जोड़ने का भी कार्य करेगी। पेड़ न केवल ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, बल्कि जलवायु संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों की स्वच्छता पर भी विशेष जोर दिया गया। भारत की सांस्कृतिक पहचान उसके मंदिरों, तीर्थस्थलों और सार्वजनिक स्थानों से जुड़ी हुई है। यदि ये स्थान स्वच्छ और सुव्यवस्थित होंगे, तो यह न केवल पर्यटकों को आकर्षित करेंगे, बल्कि नागरिकों में गर्व की भावना भी उत्पन्न करेंगे।
प्रधानमंत्री ने “वोकल फॉर लोकल” के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की। यह पहल भारतीय कारीगरों, छोटे उद्योगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में सहायक होगी। जब हम स्थानीय उत्पाद खरीदते हैं, तो हम सीधे अपने देश के विकास में योगदान देते हैं।
उन्होंने नागरिकों से देश के विभिन्न हिस्सों में घूमने और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने का आग्रह किया। भारत की विविधता—संस्कृति, भाषा, भोजन और परंपराएं—दुनिया में अद्वितीय हैं। घरेलू पर्यटन न केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाता है, बल्कि राष्ट्रीय एकता को भी मजबूत करता है।
रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती अपनाने का संदेश भी इन संकल्पों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घट रही है और स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि किसानों की लागत को भी कम करती है।
प्रधानमंत्री ने मोटे अनाज यानी मिलेट्स को दैनिक आहार में शामिल करने की अपील की। मिलेट्स जैसे बाजरा, ज्वार और रागी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। यह न केवल कुपोषण से लड़ने में मदद करते हैं, बल्कि किसानों के लिए भी लाभकारी फसल हैं।
उन्होंने खाने में तेल के कम उपयोग पर भी जोर दिया। आजकल बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों, जैसे हृदय रोग और मोटापा, का एक बड़ा कारण असंतुलित आहार है। तेल का सीमित उपयोग स्वस्थ जीवनशैली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने गुरु भैरवी मंदिर का उद्घाटन किया और “सौंदर्य लहरी” तथा “शिव महिमा स्तोत्र” जैसी आध्यात्मिक पुस्तकों का विमोचन भी किया। इस अवसर पर एच. डी. देवगौड़ा भी उपस्थित थे। यह आयोजन भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और परंपरा के संरक्षण का प्रतीक था।
प्रधानमंत्री द्वारा सुझाए गए ये नौ संकल्प केवल सरकारी नीतियां नहीं हैं, बल्कि जनआंदोलन का स्वरूप ले सकते हैं। यदि हर नागरिक इन संकल्पों को अपने जीवन में अपनाए, तो देश में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। जल संरक्षण से लेकर स्वच्छता, स्थानीय उत्पादों के उपयोग से लेकर स्वस्थ आहार तक ये सभी पहलें मिलकर एक सशक्त, आत्मनिर्भर और स्वस्थ भारत का निर्माण कर सकती हैं।
आज भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। नरेंद्र मोदी का यह आह्वान केवल एक भाषण नहीं, बल्कि एक दिशा है—एक ऐसा मार्ग जो हमें जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देता है। इन नौ संकल्पों को अपनाकर हम न केवल अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध भारत का निर्माण भी कर सकते हैं।