भोपाल, 26 मई ।
मध्य प्रदेश में शुरू की गई “साइबर तहसील 2.0” व्यवस्था राजस्व प्रणाली में बड़े बदलाव का माध्यम बनकर सामने आई है। भूमि नामांतरण प्रक्रिया को डिजिटल और केंद्रीकृत करने से नागरिकों को अधिक सरल और सुगम सेवाएं मिल रही हैं।
मंगलवार को दी गई जानकारी में बताया गया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्रशासनिक पारदर्शिता, सुशासन और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य लोगों तक सरकारी सेवाएं आसान और समयबद्ध तरीके से पहुंचाना है।
नई डिजिटल व्यवस्था के जरिए अब तक प्रदेश में 5.60 लाख से अधिक ऑनलाइन नामांतरण प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है। पहले जिस प्रक्रिया में करीब 70 दिन लगते थे, वह अब अधिकांश मामलों में 20 से 25 दिन के भीतर पूरी हो रही है। इससे नागरिकों के समय, श्रम और धन की बचत भी सुनिश्चित हुई है।
राज्य सरकार ने पहले “साइबर तहसील 1.0” लागू की थी, जिसमें पूर्ण खसरा से जुड़े नामांतरण प्रकरण शामिल किए गए थे। रजिस्ट्री के बाद प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित होती थी और मानवीय हस्तक्षेप सीमित रखा गया था। इसकी सफलता के बाद सरकार ने “साइबर तहसील 2.0” लागू कर आंशिक खसरा यानी भूमि के हिस्से की बिक्री से जुड़े मामलों को भी इसमें शामिल कर लिया।
आंशिक खसरा से जुड़े मामलों को तकनीकी रूप से जटिल माना जाता है, क्योंकि इनमें सीमांकन, रिकॉर्ड संशोधन और जानकारी को अद्यतन करने की आवश्यकता होती है। नई व्यवस्था ने डिजिटल तकनीक के माध्यम से इस प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया है। इससे भूमि विवाद की संभावनाएं भी कम हुई हैं।
प्रदेश के सभी जिलों और तहसीलों में यह व्यवस्था प्रभावी रूप से संचालित हो रही है। करीब 1,192 क्षेत्रीय तहसीलदार और नायब तहसीलदार अदालतों के साथ रीयल-टाइम समन्वय से प्रकरणों की निगरानी और समयबद्ध निराकरण को अधिक प्रभावी बनाया गया है।
यह व्यवस्था केवल तकनीकी मंच तक सीमित नहीं रही, बल्कि पारदर्शी और जवाबदेह शासन की मजबूत पहल बनकर उभरी है। ऑनलाइन ट्रैकिंग और न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के चलते लोगों का भरोसा भी शासन व्यवस्था पर बढ़ा है।
मध्य प्रदेश सरकार की यह पहल अब राजस्व सुधारों के प्रभावी मॉडल के रूप में देखी जा रही है और अन्य राज्यों के लिए भी सुशासन व नागरिक-केंद्रित सेवाओं का उदाहरण बन रही है।














