रायपुर, 06 जून।
शासन की जनकल्याणकारी नीतियां आम लोगों के जीवन में खुशहाली की नई बयार लेकर आ रही हैं।
बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड के गनियारी में आयोजित 'सुशासन तिहार' शिविर में पहुंची दो अलग-अलग कहानियों ने यह साबित कर दिया है कि समय पर मिलने वाली सरकारी सहायता किस तरह किसी के भविष्य को संवार सकती है।
शशि साहू की पढ़ाई हो या किसान बहोरन लाल कौशिक की खेती, सरकारी मदद ने इन दोनों के लिए उम्मीद के नए द्वार खोल दिए हैं।
मजदूरी कर अपना घर चलाने वाले पिता की बेटी शशि साहू आर्थिक तंगी के कारण अपनी आगे की शिक्षा को लेकर चिंतित थी। गनियारी शिविर में उसे 'मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना' का संबल प्राप्त हुआ।
शासन ने छात्रा को 20 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी, जिससे उसकी पढ़ाई का रास्ता साफ हो गया है। शशि का मानना है कि यह पहल न केवल उसे आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि उसके सपनों को पंख देने में भी सहायक होगी।
दूसरी ओर, क्षेत्र के किसान बहोरन लाल कौशिक के लिए खेती के संसाधन जुटाना बड़ी चुनौती बना हुआ था। सुशासन शिविर के माध्यम से उन्हें जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से 36 हजार रुपये का कृषि ऋण प्राप्त हुआ।
अब वे इस राशि से अपने खेती-बाड़ी के कामों को गति दे सकेंगे। बहोरन लाल का मानना है कि इस तरह की वित्तीय मदद से न केवल किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।
गनियारी के इस शिविर ने रानीपारा से लेकर पूरे क्षेत्र के निवासियों के मन में शासन के प्रति एक नया विश्वास पैदा किया है। सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने के बाद इन परिवारों के चेहरों पर जो मुस्कान है, वह 'सुशासन तिहार' की सफलता का प्रमाण है। आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते ये कदम स्पष्ट करते हैं कि जनकल्याणकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है।













