तेहरान, 06 जून।
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि डोनाल्ड ट्रंप के साथ किसी भी परमाणु समझौते पर अब उसे भरोसा नहीं है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के पूर्व कमांडर-इन-चीफ और सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहसिन रेजाई ने 2015 के जेसीपीओए समझौते से अमेरिका के पीछे हटने का जिक्र करते हुए कहा कि वाशिंगटन के साथ परमाणु वार्ता के द्वार फिलहाल बंद हो चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस संवाद प्रक्रिया को पुनः शुरू करने की जिम्मेदारी अब ट्रंप प्रशासन की है।
रेजाई ने अमेरिका को दोबारा आक्रामकता न अपनाने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि अमेरिका ने फिर से सैन्य विकल्प चुना, तो वह एक अंतहीन अंधेरी सुरंग की ओर कदम बढ़ा देगा। ईरान ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि नाकेबंदी और युद्ध के हालात बने रहे, तो इस टकराव का दायरा फारस की खाड़ी से निकलकर हिंद महासागर, लाल सागर, बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य और भूमध्य सागर तक फैल सकता है।
वार्ता के मौजूदा गतिरोध पर टिप्पणी करते हुए पूर्व आईआरजीसी प्रमुख ने कहा कि अब पूरी स्थिति अमेरिका के पाले में है। ईरान के फ्रीज किए गए फंड को जारी करना विश्वास बहाली के लिए एक बड़ी परीक्षा है। यह कदम ही यह साबित करेगा कि अमेरिका वास्तव में बातचीत को आगे बढ़ाने का इच्छुक है या नहीं।








