पश्चिमी सिंहभूम, 09 जून।
किरीबुरू-मेघाहातुबुरु क्षेत्र में मंगलवार को धरती आबा बिरसा मुंडा की 126वीं पुण्यतिथि बड़े ही सम्मान और सामाजिक एकता के साथ मनाई गई। आदिवासी कल्याण केंद्र और आदिवासी सरना समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया और जननायक को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम का आरंभ पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों और प्रार्थना गीतों के साथ हुआ। समाज के दियूरी पांडू कोंगाड़ी, जयराम पाट पिंगुआ, धनुर्जय लागुरी, लोदरो स्वासी और बुद्धआ कोंगाड़ी ने पूजा-अर्चना कर समुदाय की सुख-समृद्धि के लिए कामना की। इसके बाद बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके संघर्षपूर्ण जीवन को नमन किया।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और स्वाभिमान के प्रतीक हैं। उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए समाज को संगठित किया और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 'उलगुलान' आंदोलन का नेतृत्व किया। शोषण के विरुद्ध उनके द्वारा जगाई गई चेतना आज भी प्रासंगिक है।
इस गरिमामयी अवसर पर किरीबुरू के सीजीएम पी.एम. शिरपुरकर, प्रभारी महाप्रबंधक संजय कुमार सिंह, एसडीपीओ विनीत कुमार किंडो, थाना प्रभारी रोहित कुमार, मुखिया पार्वती कीड़ो, प्रफ्फुलित ग्लोरिया टोपनो, लिपि मुंडा और मजदूर नेता अफताब आलम सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
रोयाराम चांपिया, अमर सिंह सुंडी, गोपी लागुरी, बीर सिंह मुंडा और श्याम बिरुआ समेत बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों ने कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लिया। वक्ताओं ने युवाओं से बिरसा मुंडा के आदर्शों को जीवन में उतारने और शिक्षा के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।














