पटना, 09 जून।
बिहार में अब उद्योग लगाना पहले से काफी सरल हो गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। अब निवेशकों को महज 30 दिनों के भीतर उद्योगों की स्थापना के लिए स्वीकृति प्रदान की जाएगी।
राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद (SIPB) सचिवालय को अब एकल नोडल एजेंसी के रूप में व्यापक शक्तियां दी गई हैं। सरकार का लक्ष्य निवेशकों को प्रशासनिक जटिलताओं से पूरी तरह मुक्त करना है ताकि बिहार में निवेश का एक पारदर्शी और अनुकूल माहौल तैयार हो सके।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई विभाग निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन पर निर्णय नहीं लेता है, तो 'डीम्ड क्लीयरेंस' की व्यवस्था लागू होगी। यह कानूनी रूप से बाध्यकारी होगा और संबंधित विभाग को इसे स्वीकार करना ही होगा। इस पर पुनर्विचार की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है।
इस नई कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी और विनियामक विभागों के अधिकारियों को सीधे SIPB सचिवालय में तैनात किया जाएगा। ये सभी अधिकारी औद्योगिक विकास आयुक्त के पर्यवेक्षण में काम करेंगे, जिससे सभी जरूरी अनुमतियां एक ही मंच पर तेजी से मिल सकेंगी।
सरकार उद्योगों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOP) भी तय करेगी ताकि स्वीकृति प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बनी रहे। मुख्यमंत्री का मानना है कि औद्योगिक विकास ही युवाओं के लिए रोजगार का सबसे सशक्त माध्यम है और बिहार को दुनिया भर के निवेशकों के लिए पसंदीदा ठिकाना बनाना सरकार का संकल्प है।













