नई दिल्ली, 11 जून।
वैश्विक ग्लोबल मार्केट से आज मिले-जुले और कमजोर संकेत मिल रहे हैं, जिसका असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे प्रमुख वैश्विक सूचकांक दबाव में हैं। अमेरिकी बाजारों में पिछले सत्र के दौरान बड़ी गिरावट देखी गई, जहाँ डाउ जॉन्स 953 अंक से अधिक फिसलकर बंद हुआ। चिपमेकर कंपनियों के शेयरों में आई कमजोरी ने भी अमेरिकी बाजार की स्थिति को खराब किया है।
यूरोपीय बाजारों में भी पिछले सत्र में अनिश्चितता का माहौल रहा, जहाँ डीएएक्स इंडेक्स में करीब एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, आज एशियाई बाजारों का हाल भी मिला-जुला बना हुआ है। निक्केई और कोस्पी जैसे सूचकांकों में हल्की मजबूती है, लेकिन हैंग सेंग और ताइवान वेटेड इंडेक्स जैसे बाजार भारी बिकवाली का सामना कर रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी में भी मामूली गिरावट के संकेत हैं, जो स्थानीय बाजार के लिए भी सतर्कता का संकेत दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अस्थिरता आने वाले सत्रों में निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, डाउ जॉन्स फ्यूचर्स में आज मामूली रिकवरी के संकेत हैं, जो वैश्विक निवेशकों के लिए एक छोटा सा सकारात्मक पक्ष है। ऊर्जा और तकनीक से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि वैश्विक स्तर पर इन क्षेत्रों में जारी अनिश्चितता से बाजार में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।










