दोहा, 15 जून।
मध्य पूर्व में पिछले कई महीनों से जारी तनाव के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से चल रही खींचतान के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद 28 फरवरी से अशांत रहे होर्मुज जलडमरूमध्य में अब जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो सकेगी।
इस समझौते की जानकारी देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की कि ईरान के साथ बात बन गई है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने का ऐलान किया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा कि अब तमाम मोर्चों पर युद्ध रुक जाएगा।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि यह समझौता लागू हो चुका है और इस पर औपचारिक हस्ताक्षर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे। ईरान की सेना ने इसे अपनी जीत बताते हुए कहा कि अमेरिका के पास अब झुकने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।
अमेरिकी राजनीति में इस पर तीखी प्रतिक्रिया भी देखने को मिली है। माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफरीज ने ट्रंप के इस फैसले पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले भी समझौता हुआ था जिसे ट्रंप ने ही रद्द किया था, जिससे दुनिया युद्ध की आग में झुलसी। उन्होंने बढ़ती महंगाई और ईरान के मजबूत होने पर चिंता जताई।
ट्रंप का मानना है कि यदि इस समझौते का पालन ईमानदारी से हुआ तो यह लेबनान, गाजा और हिजबुल्लाह जैसे पक्षों के बीच जारी संकट का अंत करेगा। हालांकि, जमीनी स्तर पर सहयोगी गुट इसे कैसे लेंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
दुनिया भर के नेताओं ने इस पहल का स्वागत किया है। कतर, तुर्किये, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी बताया है। तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस शांति प्रयास की सराहना की है।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि समझौता पूरा हो गया है और अब तेल की आपूर्ति सुचारू रूप से शुरू हो सकेगी। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने इस प्रक्रिया में कतर, सऊदी अरब और तुर्किये के योगदान को सराहा है।













