प्योंगयांग/इस्तांबुल, 19 जून।
उत्तर कोरिया ने औद्योगिक रूप से विकसित जी7 देशों द्वारा परमाणु हथियार कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करने की मांग को सिरे से खारिज करते हुए तीखा पलटवार किया है। देश के शीर्ष नेतृत्व ने इस मांग की कड़े शब्दों में निंदा की है।
उत्तर कोरियाई राष्ट्रपति किम जोंग उन की बहन और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी किम यो जोंग ने साफ किया है कि उनके देश का परमाणु संपन्न दर्जा एक ऐसी वास्तविकता है, जिसे बदला नहीं जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी दबाव में इस नीति में कोई फेरबदल नहीं होगा।
एक आधिकारिक बयान में शीर्ष अधिकारी ने जोर देकर कहा कि देश का परमाणु कार्यक्रम उनकी संप्रभुता और मुख्य राष्ट्रीय हितों से जुड़ा हुआ है। यह बाहरी सैन्य खतरों के खिलाफ आत्मरक्षा का एक बेहद जरूरी हथियार है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस दर्जे को चुनौती देने वाले किसी भी प्रयास के गंभीर नतीजे होंगे।
यह तल्खी फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी7 देशों के शिखर सम्मेलन के बाद बढ़ी है। इस बैठक में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूके और अमेरिका जैसे ताकतवर देशों ने प्योंगयांग के मिसाइल अभियानों, साइबर अपराध और क्रिप्टोकरेंसी चोरी पर गहरी चिंता जताते हुए पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की वकालत की थी।
प्योंगयांग ने इन मांगों को पुराना और पूरी तरह से अव्यावहारिक करार दिया है। दूसरी तरफ, जी7 सम्मेलन के इतर दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की।
इस दौरान ली जे म्युंग ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के परमाणु संपन्न बनने से पहले ही कड़े कदम न उठाए जाने पर अफसोस जताया है। अमेरिकी नेतृत्व ने भी इस परमाणु मसले को विशेष प्राथमिकता देने और मौजूदा गंभीर हालातों पर चिंता व्यक्त करने की बात का समर्थन किया है।












