मॉस्को, 19 जून।
मॉस्को के साथ राजनयिक संबंध और संवाद शुरू करने के संवेदनशील विषय पर यूरोपीय संघ के देशों के बीच गहरी रार पैदा हो गई है। इस कूटनीतिक रुख पर संगठन के तमाम राष्ट्र प्रमुख अब दो अलग-अलग धड़ों में विभाजित नजर आ रहे हैं।
यूरोपीय परिषद के प्रमुख एंटोनियो कोस्टा ने हाल ही में संकेत दिए थे कि वे सही समय पर बातचीत की संभावनाओं को लेकर सदस्य देशों के प्रमुखों के साथ मंत्रणा कर रहे हैं। ब्रुसेल्स में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान तमाम शीर्ष राजनेताओं ने बिना सहायकों और संचार उपकरणों के इस मुद्दे पर गहन मंथन किया।
कहा जा रहा है कि ब्लॉक ने हालिया हफ्तों में रूसी प्रशासन से कुछ संक्षिप्त राब्ते भी कायम किए थे। यद्यपि यह बातचीत किसी मुख्य एजेंडे पर केंद्रित नहीं थी, लेकिन इसने स्पष्ट किया कि साझा समूह के कुछ ऐसे क्षेत्रीय और वैश्विक हित हैं जिनकी हिफाजत करना उनके लिए जरूरी है।
इस विचार का फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने खुलकर प्रतिवाद किया है। इन दोनों बड़े नेताओं का मानना है कि रूस से चर्चा के लिए यह उचित अवसर नहीं है, और यदि कभी भविष्य में ऐसी पहल होती भी है, तो उसकी कमान फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के गठबंधन (E3) के पास होनी चाहिए।
इसके विपरीत, बैठक में मौजूद देशों की एक बड़ी तादाद ने कोस्टा के इस रुख का पुरजोर समर्थन किया है। यूरोपीय खेमे में यह बेचैनी अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकोफ और जेरेड कुशनर की मॉस्को यात्रा के अंदेशों को लेकर भी है, क्योंकि ऐसा लगता है कि वाशिंगटन बिना यूरोपीय भागीदारी के यूक्रेन मामले पर सीधे संवाद करना चाहता है।
इस बीच, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनका देश यूरोप के साथ टेबल पर बैठने को राजी है, मगर इसके लिए मॉस्को को किसी किस्म की कोई जल्दबाजी या व्याकुलता नहीं है।











