तमिलनाडु
19 Jun, 2026

मेकेदाटु बांध के खिलाफ तमिलनाडु विधानसभा में विशेष प्रस्ताव पारित, केंद्र से रोक की मांग

तमिलनाडु विधानसभा ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय द्वारा पेश विशेष प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर केंद्र सरकार से कर्नाटक की मेकेदाटु बांध परियोजना को किसी भी प्रकार की मंजूरी न देने का आग्रह किया है।

चेन्नई, 19 जून।

कर्नाटक सरकार की ओर से प्रस्तावित मेकेदाटु बांध परियोजना के खिलाफ तमिलनाडु की विधानसभा में शुक्रवार को एक विशेष प्रस्ताव पेश किया गया। सूबे के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने सदन के पटल पर इस प्रस्ताव को रखते हुए केंद्र सरकार से पुरजोर मांग की कि वह इस बांध के निर्माण के लिए किसी भी तरह की तकनीकी, प्रशासनिक या फिर पर्यावरणीय क्लीयरेंस कतई न दे।

तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) सरकार के सत्ता संभालने के बाद विधानसभा का यह पहला सत्र बीते गुरुवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ था। सदन की कार्यवाही के दूसरे दिन आज राज्यपाल के अभिभाषण पर होने वाली धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा को रोककर सरकार के इस विशेष प्रस्ताव को पटल पर चर्चा के लिए लाया गया।

आज की बैठक का आगाज भूतपूर्व विधायकों सी. रामासामी, डी. वीरासामी, सी. स्वामीनाथन, एच.जी. आरुमुगम, पी. कन्नन और ए. नंजिल मुरुगेशन के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने के साथ हुआ। इसके बाद राजस्व मंत्री एवं सदन के नेता के.ए. सेंगोट्टैयन ने इस विशेष सरकारी प्रस्ताव को सदन में चर्चा के लिए प्रस्तुत करने की अनुमति मांगी।

मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने प्रस्ताव पेश करने के दौरान कहा कि कर्नाटक प्रशासन कावेरी नदी पर मेकेदाटु में बांध बनाने के लिए मनमाने तरीके से काम कर रहा है। उन्होंने दलील दी कि यह कदम पांच फरवरी 2007 को कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अंतिम आदेश और 16 फरवरी 2018 को उच्चतम न्यायालय के फैसले की मूल भावना के सरासर खिलाफ है। इसके अलावा पड़ोसी राज्यों की रजामंदी और केंद्र की हरी झंडी के बिना इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की कोशिश कतई स्वीकार करने योग्य नहीं है।

उन्होंने सदन को बताया कि कावेरी न्यायाधिकरण और सर्वोच्च अदालत ने कावेरी बेसिन को जल-कमी वाला इलाका मानते हुए उपलब्ध पानी का हिस्सा पहले ही सभी संबंधित राज्यों के बीच बांट दिया है। ऐसी स्थिति में इस पूरे जलग्रहण क्षेत्र के भीतर किसी भी तरह के नए प्रोजेक्ट या अतिरिक्त पानी को जमा करने वाली किसी भी योजना को जमीन पर नहीं उतारा जा सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कावेरी नदी के पानी का विवाद तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों ही राज्यों के लिए बेहद भावुक और संवेदनशील मसला है। इसलिए केंद्र सरकार को यह जिम्मेदारी तय करनी चाहिए कि कावेरी बेसिन के किसी भी हिस्से में अन्य जलग्रहण राज्यों की लिखित सहमति के बिना कोई नया बांध या बड़ा जलाशय बनाने की शुरुआत न हो सके।

इस विशेष प्रस्ताव के जरिए केंद्रीय जल आयोग से भी यह पुरजोर सिफारिश की गई कि वह कर्नाटक सरकार की तरफ से भेजी गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर कोई ध्यान न दे, न ही उस पर किसी प्रकार की आगे की कार्रवाई करे और उसे पूरी तरह खारिज कर दे।

पूरे सदन ने एक सुर में यह घोषणा भी की कि मेकेदाटु परियोजना के विरोध और राज्य के किसानों के हित की रक्षा करने के उद्देश्य से तमिलनाडु सरकार द्वारा जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, उन्हें सदन का पूरा समर्थन हासिल है।

प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूर करते हुए तमिलनाडु विधानसभा ने केंद्र से कर्नाटक की इस योजना को किसी भी स्तर पर मंजूरी न देने की अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया और कावेरी पानी के बंटवारे से जुड़े कानूनी व न्यायिक नियमों का कड़ाई से पालन कराने की बात कही।

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