पटना, 19 जून।
वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में लगभग 10 लाख पेशेवरों की कमी को देखते हुए भारत के लिए इसे एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने शुक्रवार को कहा कि यह स्थिति देश को इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाला प्रमुख केंद्र बना सकती है।
पटना स्थित सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) केंद्र में संबोधन के दौरान उन्होंने बताया कि दुनिया का सेमीकंडक्टर उद्योग वर्तमान में लगभग 800 अरब डॉलर का है और आने वाले एक वर्ष में इसके 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक होने की संभावना है। साथ ही उन्होंने कहा कि वर्ष 2032 तक इस क्षेत्र में करीब 10 लाख नई नौकरियां बनने की उम्मीद है, लेकिन इसी अनुपात में कुशल पेशेवरों की भारी कमी भी बनी रहेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए दो प्रमुख क्षेत्रों—सेमीकंडक्टर डिजाइन और निर्माण—पर विशेष ध्यान देना होगा। सरकार देश में विश्वस्तरीय डिजाइन क्षमता विकसित करने के लिए लगातार काम कर रही है, ताकि यहां से निकलने वाले छात्र वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा के रूप में पहचाने जाएं और उन्हें तुरंत उद्योग में अवसर मिल सके।
मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि डिजाइन से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों और पहलों के तहत अब तक लगभग 75 हजार छात्रों को अवसर मिल चुके हैं, और लक्ष्य इसे बढ़ाकर 5 लाख छात्रों तक पहुंचाना है।
इसके अलावा उन्होंने बताया कि देश में सेमीकंडक्टर निर्माण की गतिविधियां भी शुरू हो चुकी हैं। उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ ही प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा। भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत डिजाइन, निर्माण और पैकेजिंग को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है और कई परियोजनाएं क्रियान्वयन चरण में हैं।
एसटीपीआई दौरे के दौरान उन्होंने स्टार्टअप इकोसिस्टम को महानगरों से आगे टियर-2 और टियर-3 शहरों तक ले जाने की दिशा में चल रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए इन क्षेत्रों में एसटीपीआई केंद्रों को लगातार मजबूत किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने युवा उद्यमियों से संवाद कर उनके अनुभव सुने और स्टार्टअप तथा तकनीकी उद्यमों के लिए सरकारी सहयोग को और बेहतर बनाने पर विचार साझा किए।


















