नई दिल्ली, 19 जून।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि देश में पासपोर्ट सेवाएं अब पहले की तुलना में अधिक तेज, सुलभ और लोकतांत्रिक हो चुकी हैं। उन्होंने यह बात क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारियों के वार्षिक सम्मेलन में कही, जहां उन्होंने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और नागरिक सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि दुनिया भर में भारतीय प्रतिभा की मांग और प्रतिष्ठा तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में प्रभावी और सुगम पासपोर्ट सेवा एक विकसित और वैश्विक रूप से जुड़े भारत की मजबूत नींव बन रही है। उनके अनुसार विदेश नीति के माध्यम से भारत स्वयं को ‘विश्व बंधु’ के रूप में स्थापित कर रहा है, जिससे भारतीय पासपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और भरोसा मिल रहा है।
विदेश मंत्री ने कहा कि पासपोर्ट प्राप्त करना किसी संघर्ष का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि यह हर नागरिक का अधिकार है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 138 लाख से अधिक पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं, जो नागरिकों की बढ़ती आकांक्षाओं और वैश्विक अवसरों की ओर उनके कदमों को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2014 में देश में केवल 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 544 हो चुकी है। इनमें 93 पासपोर्ट सेवा केंद्र और 454 डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र शामिल हैं, जिससे सेवाएं अधिक व्यापक और सुलभ हुई हैं।
जयशंकर ने कहा कि पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम संस्करण 2.0 ने वैश्विक गतिशीलता को नई दिशा दी है। उनके अनुसार पासपोर्ट केवल यात्रा दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह आर्थिक प्रगति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और राष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।


















