नई दिल्ली, 19 जून
भारतीय टेबल टेनिस की स्टार खिलाड़ी मनिका बत्रा ने 2026 एशियाई खेलों की राष्ट्रीय टीम से खुद को बाहर किए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। स्टार पैडलर ने खेल मंत्री मनसुख मांडविया और भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) से इस पूरे मामले की गहराई से जांच करने की मांग की है ताकि भविष्य में खिलाड़ियों का चयन पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से हो सके।
भारतीय टेबल टेनिस महासंघ (टीटीएफआई) की तरफ से घोषित की गई नई टीम में पुरुष वर्ग की कमान जी. साथीयन संभालेंगे, तो वहीं महिला ब्रिगेड का नेतृत्व श्रीजा अकुला के हाथों में होगा। महिला टीम में यशस्विनी घोरपड़े, दीया चितले, सुतीर्था मुखर्जी और सिंड्रेला दास जैसी खिलाड़ियों को जगह दी गई है। इस मुख्य टीम से मनिका बत्रा का नाम गायब है और उन्हें रिजर्व खिलाड़ियों की फेहरिस्त में शामिल किया गया है।
इस फैसले पर नाखुशी जताते हुए मनिका ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां किया है। उन्होंने कहा कि टीम में जगह न मिलना बेहद निराशाजनक है, परंतु उससे भी बड़ा सवाल यह है कि चयन के मापदंडों को किस तरह लागू किया गया। दिग्गज खिलाड़ी ने साफ किया कि उन्हें फेडरेशन की तरफ से अब तक बाहर किए जाने की कोई ठोस वजह नहीं बताई गई है।
मनिका के अनुसार, जो नियम सार्वजनिक हैं, उनके मुताबिक टीम का चयन विश्व रैंकिंग, घरेलू प्रदर्शन और चयनकर्ताओं के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है। उनका कहना है कि अगर यही आधार है, तो अधिकारियों को खुलकर बताना चाहिए कि किस खिलाड़ी को किस पैमाने पर कितने अंक या तरजीह दी गई है।
अपनी वर्तमान स्थिति का हवाला देते हुए 31 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी मौजूदा रैंक 51 है और वह शीर्ष-50 के बेहद करीब हैं। रैंकिंग में थोड़ा-बहुत बदलाव होना एक आम प्रक्रिया है और महज इस एक वजह से उन्हें मुख्य टीम से बाहर का रास्ता दिखा देना पूरी तरह से समझ से परे है।
अपने हालिया प्रदर्शन का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि इस सीजन में उनका खेल बेहतरीन रहा है। उन्होंने वैश्विक मंचों पर चीन जैसी मजबूत टीमों के एशियाई खिलाड़ियों को शिकस्त दी है। मनिका के मुताबिक, उनका फॉर्म आज भी उच्च स्तर की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिहाज से पूरी तरह अनुकूल है।
चयन के लिए घरेलू टूर्नामेंट्स की अनिवार्यता पर बात करते हुए मनिका ने कहा कि जो खिलाड़ी लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं, उनके लिए हर एक घरेलू मैच में हिस्सा ले पाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हो पाता।
उन्होंने चयन समिति के विशेषाधिकारों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर विशेष शक्तियों का उपयोग किया जाता है, तो उसकी पूरी प्रक्रिया लिखित और स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने महासंघ से मांग की है कि उन्हें बाहर रखने के कारणों और निर्णयों का पूरा ब्योरा लिखित रूप में दिया जाए।
गौरतलब है कि मनिका बत्रा देश की सबसे कामयाब टेबल टेनिस खिलाड़ियों में शुमार हैं। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में दो गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया है। इसके अलावा वह एशियाई खेल में भी कांस्य पदक जीत चुकी हैं। वह इन खेलों की एकल स्पर्धा के अंतिम-16 तक पहुंचने वाली देश की पहली महिला खिलाड़ी हैं।












