नई दिल्ली, 19 जून।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में सिविल सेवा परीक्षा मार्गदर्शन कार्यक्रम "प्रोजेक्ट सुपर 50" का सफलतापूर्वक शुभारंभ किया। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार इस कार्यक्रम की थीम “मार्गदर्शन, सलाह देना और सशक्तिकरण” रखी गई। यह पहल अनुसूचित जाति (एससी) के युवाओं को शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्रसेना रेड्डी नल्लू ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर के दृष्टिकोण और विजन का आह्वान किया। उन्होंने सिविल सेवा उम्मीदवारों को परीक्षा की तैयारी के गुर सिखाए, भारत में सिविल सेवा के इतिहास पर प्रकाश डाला और सफलता के लिए रणनीतियों पर मार्गदर्शन साझा किया।
एनसीएससी के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने आयोग के गठन, जनादेश, शक्तियों और अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में आयोग की भूमिका विस्तार से बताई। डॉ. पार्थ बिस्वास ने युवाओं को अंबेडकर के प्रेरक मंत्र “शिक्षित हो, संगठित हो, आंदोलन करो” अपनाने का आह्वान किया।
एनसीएससी के सचिव गुडे श्रीनिवास ने उम्मीदवारों को परीक्षा के तनाव से निपटने और बेहतर प्रदर्शन के लिए बहुमूल्य सुझाव दिए। आयोग के सदस्य वड्डेपल्ली रामचंदर ने भी युवाओं का उत्साहवर्धन किया। वरिष्ठ आईएएस और आईआरएस अधिकारी भी उपस्थित रहे और अपने अनुभव, परीक्षा रणनीतियां और प्रशासनिक जीवन के व्यावहारिक पहलुओं को साझा किया।
एनसीएससी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार “प्रोजेक्ट सुपर 50” का उद्देश्य समाज के वंचित वर्ग के होनहार छात्रों को सही दिशा और संसाधन प्रदान करना है, ताकि वे देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवाओं में अपनी जगह बना सकें। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सिविल सेवा उम्मीदवारों, सेवारत अधिकारियों और शिक्षाविदों ने भाग लिया।


















