क्वेटा (बलोचिस्तान), 19 जून।
बॉर्डर बंद होने के चलते पड़ोसी मुल्कों के बीच वाणिज्यिक गतिविधियां ठप पड़ गई हैं, जिससे सरहद के दोनों ओर के कारोबारियों को भारी आर्थिक चोट पहुंची है। व्यापारिक नुकसान का यह आंकड़ा अब अरबों रुपये तक जा पहुंचा है।
एक हालिया दावे के मुताबिक, ट्रेड रूट और सीमाओं के बंद रहने के कारण बीते आठ महीनों के भीतर पाकिस्तानी कारोबार जगत को 278 अरब रुपये से ज्यादा की चपत लगी है। इसी अवधि के दौरान अफगानी व्यवसायियों को भी करीब 140 अरब पाकिस्तानी रुपये का भारी घाटा उठाना पड़ा है।
सीमा सुरक्षा प्रबंधन से जुड़े विवादों के कारण वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच होने वाले सालाना निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई, जो 4.5 फीसदी से सिमटकर महज 1.5 फीसदी पर आ गई। इसके चलते वार्षिक एक्सपोर्ट के मामले में शीर्ष दस देशों की सूची से भी बाहर होने की नौबत आ गई है।
तनावपूर्ण हालातों के मद्देनजर पिछले साल 13 अक्टूबर से ही तोरखम बॉर्डर और चमन सीमा सहित तमाम रास्तों पर आवाजाही ठप है, जहां फिलहाल केवल अफगान शरणार्थियों की घर वापसी को मंजूरी दी गई है। इस नाकेबंदी ने न सिर्फ आर्थिक मोर्चे को तोड़ा है, बल्कि मेडिकल टूरिज्म पर भी बहुत गहरा विपरीत प्रभाव डाला है।
तमाम अड़चनों की वजह से लगभग एक बिलियन डॉलर का सालाना ट्रेड वॉल्यूम बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे दोनों देशों के कई अहम व्यावसायिक क्षेत्रों की कमर टूट गई है।












