निगम-मंडल आयोगों की सूची आई तो कुछ जिलों के जनप्रतिनिधियों के चेहरे भी उतर गए। चर्चा यह है कि पूरी ताकत झोंककर सीटें जितवाईं, लेकिन इनाम की बारी आई तो नाम तक याद नहीं रखा गया।
अब जब पुराने साथी मिलते हैं तो विकास की नहीं, उपेक्षा की चर्चा ज्यादा होती है। सवाल वही है कि आखिर यह भूल थी या कोई बड़ा संदेश?













