बरसों तक हर चौखट पर दस्तक देने के बाद आखिरकार किस्मत मेहरबान हुई और कुर्सी मिल गई। अब मुश्किल यह नहीं कि पद कैसे संभालें, बल्कि यह है कि धन्यवाद किसे दें।
हर मिलने वाला खुद को असली सूत्रधार बता रहा है। साहब भी किसी को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा रहे। इसलिए इन दिनों उनका धन्यवाद अभियान पूरे शबाब पर है।













