वाशिंगटन, 22 जून।
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा नए एच-1बी वीजा आवेदकों पर लगाए गए एक लाख डॉलर यानी लगभग 85 लाख रुपये के अतिरिक्त शुल्क को गैरकानूनी करार देकर रद्द कर दिया है। यह फैसला केवल कानूनी जीत नहीं, बल्कि योग्यता और श्रम की गरिमा की भी जीत है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के पास कांग्रेस की मंजूरी के बिना इस प्रकार का कर लगाने का अधिकार नहीं है। कर लगाने की शक्ति केवल विधायिका के पास होती है। यह निर्णय अमेरिकी संविधान की मूल भावना और शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत की पुष्टि करता है।
इस फैसले से अमेरिका में अपने कौशल के बल पर करियर बनाने का सपना देखने वाले हजारों भारतीय आईटी पेशेवरों को बड़ी राहत मिली है। एच-1बी वीजा अमेरिका की तकनीकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। सिलिकॉन वैली से लेकर न्यूयॉर्क तक अनेक बड़ी टेक कंपनियां भारतीय इंजीनियरों, डेटा वैज्ञानिकों और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों पर निर्भर हैं। भारतीय पेशेवर न केवल नवाचार को गति देते हैं, बल्कि अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मकता भी मजबूत करते हैं। ऐसे में एक लाख डॉलर का अतिरिक्त शुल्क प्रतिभा के प्रवाह पर अप्रत्यक्ष रोक के समान था।
इस निर्णय का पहला आयाम संवैधानिक है। अदालत ने याद दिलाया कि लोकतंत्र में कर लगाने की शक्ति जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के पास होती है। दूसरा आयाम आर्थिक है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कुशल श्रम की निरंतर आवश्यकता है। तकनीक के विस्तार के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्त और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भी सॉफ्टवेयर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मांग बढ़ी है। यदि वीजा प्रक्रिया अत्यधिक महंगी और जटिल होगी तो कंपनियां नवाचार की गति खो देंगी या परियोजनाएं दूसरे देशों में स्थानांतरित करेंगी।
तीसरा आयाम मानवीय है। हर एच-1बी आवेदक के पीछे वर्षों की मेहनत और एक परिवार के सपने जुड़े होते हैं। इतना भारी शुल्क प्रतिभा की जगह आर्थिक क्षमता को निर्णायक बना देता। यह उस अमेरिकी आदर्श के विपरीत है, जो मेहनत और योग्यता को सफलता का आधार मानता है। भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी में आईटी पेशेवर महत्वपूर्ण सेतु हैं। इसलिए वीजा नीति में अनावश्यक बाधाएं दोनों देशों के साझा हितों के विरुद्ध हैं।
एच-1बी वीजा के दुरुपयोग और स्थानीय रोजगार पर प्रभाव जैसी चिंताओं से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन उनका समाधान अतिरिक्त कर नहीं, बल्कि बेहतर निगरानी, पारदर्शिता और श्रम नियमों के कड़ाई से पालन में है। भारत सरकार और उद्योग जगत को इस अवसर का उपयोग करते हुए अमेरिका के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए और देश में भी अनुसंधान, नवाचार तथा उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर सृजित करने चाहिए। अंततः यह फैसला कानून, प्रतिभा और वैश्विक सहयोग की जीत है, जो बताता है कि अवसर मिलने पर ही प्रतिभा दुनिया को आगे बढ़ाती है।












