गुवाहाटी, 27 जून।
असम के वन विभाग ने वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। प्रशासनिक टीम ने आसमान में उड़ने वाले अत्यंत दुर्लभ और कानूनन रूप से पूरी तरह सुरक्षित माने जाने वाले हॉर्नबिल पक्षी के अवैध शिकार से जुड़े एक गंभीर मामले का भंडाफोड़ करते हुए तीन शातिर आरोपियों को दबोच लिया है। बेजुबान जीवों के संरक्षण की दिशा में वन अमले की इस रेड को एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
विभागीय सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, इस पूरी कार्रवाई को दीगबोई वन प्रभाग के अधीन आने वाले मार्घेरिटा ईस्ट रेंज के जंगली इलाके में अंजाम दिया गया। वहां खुफिया तंत्र से मिली एक बेहद सटीक और गुप्त सूचना के आधार पर विशेष जाल बिछाकर तलाशी अभियान चलाया गया, जिसके बाद इन तीनों शिकारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। शुरुआती दौर की पूछताछ और विभागीय छानबीन में यह चौंकाने वाला सच उजागर हुआ है कि पकड़े गए आरोपी बीते काफी लंबे समय से इस अति-संरक्षित प्रजाति के पक्षियों का अवैध रूप से शिकार करने की आपराधिक गतिविधियों में लिप्त थे।

पूर्वोत्तर राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री जयंत मल्लबरुवा ने इंटरनेट मीडिया के जरिए इस पूरे बड़े अभियान की सफलता को आम जनता के साथ साझा किया। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी इस त्वरित और बेहद सफल कार्रवाई को अंजाम देने वाली दिगबोई वन प्रभाग की जांबाज टीम की खुलकर पीठ थपथपाई। मंत्री ने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए साफ लफ्जों में कहा कि राज्य प्रशासन वन्यजीवों और जंगलों को किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचाने वाले तत्वों के खिलाफ पूर्ण रूप से शून्य सहनशीलता की सख्त नीति पर काम कर रहा है और ऐसे अपराधियों को कतई बख्शा नहीं जाएगा।
पकड़े गए तीनों शिकारियों को हिरासत में लेने के बाद वन विभाग ने उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की बेहद सख्त और गैर-जमानती कानूनी धाराओं के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत कर लिया है और उनसे गहनता से पूछताछ की जा रही है। इस कानूनी तफ्तीश के दौरान अधिकारी मुख्य रूप से इस बात की भी बारीक पड़ताल कर रहे हैं कि इन शिकारियों के तार कहीं देश के अन्य राज्यों में फैले हुए किसी बड़े अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क या सिंडिकेट से तो नहीं जुड़े हैं।














