भोपाल, 27 जून।
मध्यप्रदेश में वन विभाग की कार्रवाई से जुड़ा एक मामला चर्चा में है, जहां रेस्क्यू किए गए सांभर को मानव भोजन खिलाने के आरोप में एक एसडीओ फॉरेस्ट को निलंबित कर दिया गया। यह कदम प्रमुख सचिव वन अशोक वर्णवाल के निर्देश पर उठाया गया। विभाग ने इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 और निर्धारित प्रोटोकॉल के उल्लंघन के रूप में माना है।
जानकारी के अनुसार, पिछले सप्ताह वन अमले ने जंगल से एक घायल सांभर का रेस्क्यू किया था। उपचार के लिए उसे अस्थायी शिविर में रखा गया था। इसी दौरान मौके पर मौजूद एसडीओ फॉरेस्ट ने उसे प्लेट में पोहा खिला दिया। इस घटना का वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिसके बाद मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गया।
वीडियो सामने आने के बाद प्रमुख सचिव वन ने तत्काल मामले की समीक्षा कराई। विभागीय जांच में इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीव प्रबंधन में निर्धारित नियमों का पालन हर स्थिति में अनिवार्य है।
विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार, रेस्क्यू किए गए किसी भी वन्यप्राणी को केवल अधिकृत पशु चिकित्सक की निगरानी में तय आहार ही दिया जा सकता है। मानव भोजन देने से उसके पाचन तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के साथ उसकी प्राकृतिक आदतों में भी बदलाव की आशंका रहती है। एसओपी में स्पष्ट रूप से विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही भोजन उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
इस कार्रवाई के बाद पूरे वन विभाग में हलचल है। मामले की जांच सीसीएफ स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि रेस्क्यू के समय अन्य कौन-कौन अधिकारी मौजूद थे और उनकी भूमिका क्या रही। विभाग फील्ड अधिकारियों को रेस्क्यू प्रोटोकॉल संबंधी प्रशिक्षण दोबारा देने पर भी विचार कर रहा है।
बताया गया है कि संबंधित एसडीओ ने अपने पक्ष में कहा कि सांभर भूखा था और तत्काल उसके लिए अन्य भोजन उपलब्ध नहीं था, इसलिए उसे पोहा दिया गया। हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि आपात स्थिति में भी विभागीय नियमों से समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता और वन्यजीव संरक्षण में वैज्ञानिक प्रक्रिया का पालन सर्वोपरि है।
सोशल मीडिया बना कार्रवाई का आधार
वन विभाग में सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो लगातार कार्रवाई का कारण बन रहे हैं। इस मामले में भी 22 सेकंड के वायरल वीडियो के आधार पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
पिछले वर्ष रेस्क्यू किए गए तेंदुए के साथ सेल्फी लेने के मामले में भी एक रेंजर को निलंबित किया गया था। विभाग वन्यजीवों के साथ किसी भी प्रकार की मानवीय छेड़छाड़ को लेकर शून्य सहनशीलता की नीति पर अमल कर रहा है।














